दुनिया की सबसे बदनसीब घोषित महिला " सारा बर्टमैंन " का जन्म साउथ अफ्रीका के ईस्टर्न कैप में खोइखोई ( ब्लैक अफ़्रीकन) कबीले में हुआ था । दो साल की उम्र के माँ बाप के गुज़रने से अनाथ हो गयी ,
उम्र के साथ सारा जैसे-जैसे बड़ी होती गईं उनके शरीर का पिछला हिस्सा यानी नितम्ब (Hips) जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगा ..... यह उस समय असमान्य था
हालाँकि आज के वक़्त में #किम_करदर्शियां (हॉलीवुड ऐक्ट्रेस) से प्रेरित होकर लाखों औरतें हिप्स की सिलिकॉन सर्जरी करा चुकी हैं ।
साउथ अफ्रीका में अंग्रेज राज था , एक अंग्रेज एलेग्जेंडर डनलप ने सारा को इंग्लैंड ले जाने पर मजबूर किया और पैसों के लिए उसे सरकस में अर्ध नग्न नुमाइश करवाई गई
लोग भद्दे कमेंट करते , ज़्यादा पैसे देने पर वह इस काली महिला को उंगली या छड़ी से मार भी सकते थे ।
घरों पर पर्सनल शो आयोजन के नाम पर यौन उत्पीड़न किया गया ......
इंग्लैंड में गुलामी प्रथा के खिलाफ कानून बनने के बाद उसे फ्रांस को बेच दिया गया
और उसके जिस्म पर ऐसे रेसिस्ट प्रोपगंडा रिसर्च की गईं जिसमे बताया गया कि " वहशी महिला " एक " सभ्य (गोरी) महिला " से कमतर क्यों है ।
मरने के बाद उसके बॉडी पार्ट्स को काट कर म्यूजियम में नुमाइश के लिए रख दिया गया
#नेंसल_मंडेला के दबाव के बाद फ्रांस काफी आनाकानी करते हुए आखिर उसके शरीर के अवशेष वापस करने को राजी हूआ ।
और उसको राजकीय सम्मान के साथ 187 साल बाद कफ़न नसीब हो सका ...... 🙇
सारा की बदनसीबी दक्षिण भारत की #नांगेली से कम दुःखद नहीं है ।
यह पश्चिमी समाज आज खुद को नारीवाद का सबसे बड़ा प्रोधा घोषित करता है
यह आप पर निर्भर है कि आप तै करें
यह महिला की बदनसीबी थी या पश्चिमी समाज का घिनौनापन था ?
योरोपियन डार्क हावर्स कह देने से घिनौनेपन से राहे फरार मुमकिन नहीं है ।
मिलियन , बिलियन डॉलर प्रोपगंडा पर खर्च करने के बाद भी यह हक़ीक़त नहीं बदलती
कि " इन्सानी हुक़ूक़ के तमाम पैमाने #इस्लाम के उरूज़ के साथ तै हुए हैं ,
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