Friday, 5 January 2024
रोमन एम्पायर
रोमन एम्पायर..
ईसा के 500 साल पहले शुरू हुआ, और पूर्वी रोमन एम्पायर को जोड़ दें, तो अंत 15 वीं शताब्दी में हुआ। 2000 साल !!!
रोम 200 दशक, बीस सदियां, दो मिलेनियम टिका रहा.. उस दौर में, सुदूर इलाकों तक। जहां से आने जाने में बरसों लग जाते।
वहां रोमन साम्राज्य टिका रहा। कारण??
एप्रोप्रियेशन!!
●●
घुल जाना, मिल जाना, मिला लेना।
सुदूर इलाके लड़कर जीते जाते। गैर रोमन भाषा, कल्चर वालों के ऊपर फ़ौज, पैसे या फूट से, सत्ता कायम हो जाती। पर स्थिर कैसे हो??
तो वहां जड़े गहरी बनाई जाती। लोकल कस्टम, रूल्स, धर्म, रवायतों, खानपान से छेड़छाड़ नही होती।
वहां रूलर भी उनका अपना आदमी ही रखा जाता। उनकी भाषा बोलने वाला, उनके रंग वाला, उनके धर्म वाला।
●●
इसकी एक शानदार व्यवस्था थी। ट्राइबल, बर्बर इलाको के कबीलाई चीफ के बच्चो को सुरक्षा का भरोसा देकर रोम लाया जाता।
उन्हें प्राचीन रोम शहर के सबसे बेहतरीन संस्थानो में शिक्षा दी जाती। युद्ध नीति, दर्शन, कानून, रोमन सभ्यता की सबसे बेहतरीन शिक्षा।
5-7 साल के बच्चे, बड़े होकर रोमन वारियर बनते। उनमे से बेस्ट, वफादार लोग, विजित सूबों में प्रशासक बनाकर भेजे जाते।
●●
विजित इलाको में राज्यपाल की तरह, एक रोमन फ़िगरहेड होता। लेकिन स्थानीय, रोम में शिक्षित, रोमनाइज्ड अफसर रोमन सत्ता के पायदान बनते।
ट्राइबल चीफ्स अपने बच्चो को रोमन ब्यूरोक्रेसी का हिस्सा बनते देखकर खुश होते।रोमन ड्रेस, रोमन भाषा, रोमन औरा में अपने बच्चे को देखना उनके लिए गर्व की बात होती।
आर्मीनियस ( ऑफ जर्मनी, सर्च कीजिए) के विद्रोह जैसे अपवाद को छोड़ दें, तो ये व्यवस्था रोमन राज के स्थायित्व का आधार थी।
●●
ठीक यही व्यवस्था ऑटोमन्स ने अपनायी।
वे सेंट्रल यूरोप से ईसाई, सर्ब, क्रोट्स,और तमाम आदिम जातियों के परिवार से बच्चे, मांगकर लेते।
इस्तांबुल लाते, औऱ बेहतरीन शिक्षा देते। इस्लाम मे ढाला जाता। राजा के प्रति शपथ दिलाकर, इन्हें जाँनिसारी टुकड़ी में भरती किया जाता।
जॉनिसार, ऑटोमन सेना की सबसे एलीट टुकड़ी थी। इसी से सेनानायक, पॉलिटिशियन और गवर्नर निकलते। हाल तो ये था कि लोग इसमे अपने बच्चे देने के लिए रिश्वत भी देते।
तो ऑटोमन्स का साम्राज्य 500 साल चला।
●●
अंग्रेजो ने आईसीएस बनाई।
भारत मे भूरे साहब खड़े किए। ब्रिटिश के लिए, ब्रिटिश से ज्यादा लॉयल सैनिक, प्रशासनिक अफसर बनाये।
लोकल राजाओ को भी 370 नुमा अधिकार दिये, इज्जत, पदवी, दरबार मे ऊंचा आसन दिया।
नतीजा- 200 साल, बेखटके राज किया।
●●
वेदों में गेरुए वस्त्र का विवरण नही।
देवी देवताओं का पूजन लाल वस्त्र या श्वेत वस्त्र में होता है। बुद्ध का चीवर जरूर गेरुआ था। आंखों को चुभने वाला रंग, जो दूर से दिखे, कि देखो भिक्खु आ रहा है।
ये रंग चालाकी से हिंदुत्व का वस्त्र हो गया। अनार्यों के देव शिव, आर्यों के ग्रन्थों में ब्रह्मा और विष्णु के साथ बिठाकर त्रिदेव बना दिये गए। कांग्रेसियों के सुभाष, सरदार संघी फोक का हिस्सा बन रहे हैं।
इट इज, माई फ्रेंड, एप्रोप्रियेशन !!!
■◆■
सत्ता के लिए, स्वीकार्यता के लिए, मान्यता और स्थिरता के लिए इतिहास में सबसे पॉवरफुल टूल रहा है।
ईस्टर्न रोमन एंपायर तो इसलिए और लम्बा जिया, क्योकि राजा कॉन्सटेंटाइन ने पब्लिक का धर्म, याने क्रिस्चियनिटी को अपना लिया।
बिल्कुल वही धर्म, जिसके प्रणेता को खुद रोमनों ने ही सूली पर चढ़ाया था।
●●
रिवर्स में आइये।
रेसियल उच्चता के घमण्ड, और एप्रोप्रियेशन के अभाव में, नाजी जर्मनी 12 साल में मिट गया।
नेपोलियन का साम्राज्य महज 10 साल में खत्म हो गया, कारण- एकीकृत नेपोलियनिक कोड का हर जगह जबरन पालन कराना।
स्थानीयता के निरादर, घुलने मिलने एप्रोप्रियेशन के अभाव में दिल्ली सल्तनत का कोई भी वंश (गुलाम, खिलजी, लोदी, तुगलक) 100-50 साल से ज्यादा न चला।
अंग्रेज भी लिमिट में ही जोड़ पाए, तो महज 200 साल का राज पाया।
लेकिन मुगल 400 साल निकाल गए।
●●
एक भाषा, एक रंग, एक धर्म, एक वस्त्र, एक बाजार, एक टैक्स, एक नेता, एक भगवान..
ये थोपना, अस्थिरता का, अस्वीकार्यता का, रेबेलियन का मूल है। रेजीम की मूर्खता है।
तब और गहराई से समझें।
जिसे सहिष्णुता, बहुरंगता, समरसता, प्रेमभाव वगैरह के नामों से ग्लैमराइज किया जाता है,
वो एप्रोप्रियेशन की बेहद ठंडी, चालाकी भरी पॉलिसी है। होशियारी है, स्मार्टनेस है, धूर्तता है,जो रेजीम को स्थिरता देती है।
राष्ट्र की उम्र बढाती है।
●●
75 साल का यह राष्ट्र, कितना रोमनों की तरह व्यवहार करता है, और कितना नाजियों की तरह..
इसकी उम्र इसी से निर्धारित होगी।
क्योकि अजर अमर कुछ नही होता। राजा नही, पार्टी नही, विचारधारा नही,
और इतिहास बताता है,
कि कोई देश भी नही..
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी।
क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी। वह प्राचीन मिस्र की भाषा जानत...
-
" पहले बोस्निया को समझिए, ताकि आप ग़ज़ा और वहां जो कुछ हो रहा है, उसे समझ सकें और हैरान न हों...!!! सर्बों ने बोस्निया के मुसलमानों क...
-
रोमन एम्पायर.. ईसा के 500 साल पहले शुरू हुआ, और पूर्वी रोमन एम्पायर को जोड़ दें, तो अंत 15 वीं शताब्दी में हुआ। 2000 साल !!! रोम 200 दशक...

No comments:
Post a Comment