हिन्दुस्तान समेत दुनिया भर मे इल्म की शमा रोशन करने वाले अजीम माहिरे तालीम मुहसलह कौम व मिल्लत सर सय्यद अहमद खाॅ के 206 यौमे विलादत पर खिराजे ए अकीदत।
17 अक्तूबर 1817 को दिल्ली के एक सादगी पसंद खानदान में पैदा होने वाले सर सय्यद अहमद खा की कौम व मिल्लत के इस खिदमात को कभी फरामोश नही किया जा सकता।सर सय्यद एक दर्द मन्द मसलहा माएनाज आलिम दूरअंदेश दीनी व असरी उलूम के माहिर अजीम फिलासफर बुलन्द पाया इस्लामिक स्कॉलर और उस मुल्क की अजीम दरसगाह अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के बानी थे।
सर सय्यद अहमद खा ने उस पुर आसोब दौर में मुसलमानों की हालत ए जार को देखते हुए इनके अन्दर इल्मी तहरीक पैदा करने तालीमी बेदारी लाने और इनके अन्दर से जहालत व नखावानदगी को दुर करने मे बेमिसाल व ल जवाल किरदार अदा किया इनकी इस खितमता को रहती दुनिया तक फ़रामोश नही किया जा सकता उनहोंने 1875 मे मुहम्डम एंग्लो ओरिएंटल स्कूल का कयाम अम्ल मे लाकर जो अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी की शक्ल में हमारे सामने मौजूद है सर सय्यद अहमद खा को सच्ची खिराज ए अकीदत यह है कि इन की पेश कर्दा खिदमात को उन की मिशन का हिस्सा बने आज मुसलमान जिन हालात से गुजर रहा है इन से निकलने का वाहिद जरिया सर सय्यद अहमद खा के जरिए बताया गया रास्ता ही मशआले राह है उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के नाम का तालीमी शजर लगाया था वो आज एक तनावर दरख्त बनकर कौम के नौनिहालो को फैजयाब कर रहा है। इसके फल से मुल्क ही नही बल्कि बेरुने मुल्क के लोग फैज हासिल कर रहे है।
कौम की उस पुर अजम हस्ती ने मुसलमानों मे तालीमी बेदारी पैदा करने के लिए अपनी पुरी जिन्दगी वक्फ कर दी हालांकि एक वक्त ऐसा भी आया जब सर सय्यद अहमद खा के खिलाफ कुफ़्र का फतवा तक दे दिया गया लेकिन सर सय्यद ने हिम्मत नही हारी और इन्तेही साबित कदमी और जवाँ मर्दी के साथ अपने मिशन को आगे बढ़ाते रहे जिसके नतीजे में अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी जैसा तालीमी एदारा वजुद मे आया जिसके फारगीन आज पुरी दुनिया में जिन्दगी के तमाम शौबो मे अहम खिदमात अन्जाम दे रहे है। ....💞
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