Wednesday, 18 October 2023

प्राचीन सभ्यताओं का देश यमन

 
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मिस्र पुरानी सभ्यताओं का देश है मिस्र वाले गर्व से अपने देश को विश्व की माता अर्थात उम्मुल दुनिया कहते हैं और सब इसे मानते भी हैं लेकिन यमन वासी  मिस्र के इस दावे को खारिज कर देते  हैं कहते हैं खुद मिस्र की मां यमन है तो मिस्र विश्व की मां कैसे बन सकता है

देखा जाए तो यमन की यह बात इतनी ग़लत भी नहीं है मिस्र अपने फिरऔन शासकों के कारण मशहूर है और फिरऔन का सबसे बड़ा खानदान यमन से ही माइग्रेंट हो कर मिस्र पहुंचा था 

अरब सागर , लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले स्थान पर आबाद यह देश शुरू से ही एक विकसित राष्ट्र हुआ करता था बाब अल मनदब जलडमरूमध्य मार्ग सिर्फ 20 किलोमीटर  चौड़ा पानी का रास्ता है जो यमन को अफ्रिका के देश जबूती से जोड़ता है इस समय यह रास्ता विश्व व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी की हैसियत रखता है जितना महत्व नहरे सुवैज का है उतना ही महत्व बाबुल मनदब का भी है कभी चीन भारत इंडोनेशिया के सामान को पूर्वी अफ्रीका पहुंचाने वाले इस रास्ते का इस्तेमाल अब पेट्रोल ढोने वाले रास्ते के तौर पर किया जाता है 

आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व यमन ने  कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की स्थापना की थी  विश्व का सबसे पुराना बांध जिसे सद्दे मआरिब कहा जाता था वह भी यमन में था यह बांध सैकड़ों वर्ष पहले तबाह हो चुका है लेकिन इसके खंडहर  मौजूद हैं जो देखने वालों को अचंभित कर देते हैं कुरान ने भी इस बांध का ज़िक्र किया है 

इसराइल के सबसे बड़े बादशाह सलोमन जिन्हें हम मुसलमान नबी मानते हैं और सुलेमान अलैहिस्सलाम कहते हैं बहुत बड़े व शानदार राजा थे पर वह भी यमन की रानी बिलकीस की शान व शौकत सुन कर अचंभित रह गए थे 

कौमे आद यहीं के थे जिन की शान व शौकत को कुरआन ने बेनज़ीर कहा है 
(التي لم يخلق مثلها في البلاد  )
जो पहाड़ों को काट कर शानदार घर बनाते थे जिन के वैज्ञानिक मौत पर काबू पाने की दवा का अविष्कार करने में लगे हुए थे 

आज हम जिन भी लिपियों में लिखते हैं यह मुख्यतः दो चीजों पर आधारित हैं कुछ लिपि आवाज़ पर और कुछ लिपि तस्वीर पर , आवाज़ पर आधारित लिपियों की शुरुआत फोनोशियन सभ्यता ने की थी इस सभ्यता के लोग भी यमन से निकल कर एशिया यूरोप और अफ्रीका में फैले थे 

यमन शताब्दियों तक एक विकसित राष्ट्र रहा है जो अपनी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध था खुद को विश्व गुरु समझता था कभी विश्व अर्थव्यवस्था पर यहूदियों के बजाए यमन के हजरमी व्यापारियों का कब्जा हुआ करता था 

आज भी विश्व के कई बड़े पूंजीपति ऐसे हैं जिन के पूर्वजों का संबंध यमन से था इन में प्रमुख हैं ब्रुनेई सुल्तान का परिवार , बिन लादेन परिवार , अल अबूदी बैंक, मलेशिया के बड़े बिजनेसमैन और पूर्व प्रधानमंत्री अहमद बदवी का परिवार आदि खुद भारत का अंबानी परिवार अपना संबंध यमन से होने की बात कर चुका है 

अचानक उसे  नज़र लग गई यहां क़ात ( कुछ लोग गात कहते हैं ) की खेती का परिचय कराया गया क़ात भांग धतूरा की तरह का एक पौधा होता है जिस से नशा होता है कात की खेती में काफी पैसा था  यमन के लोग सब कुछ छोड़कर क़ात की खेती में लग गए जिस से किसानों के पास पैसा आया 

उन पैसों की लालच में वहां  पहले जमींदारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई हुई जिस के नतीजे में वार लार्ड्स व्यवस्था क़ायम हुई , फिर धार्मिक लड़ाईयां शुरू हो गईं सुन्नी व शिया समुदाय के ज़ैदी फिरकों में जंग होने लगी हालांकि इस से पहले शताब्दियों तक दोनों फिरके साथ साथ मिलजुल कर रहा करते थे 

यमन दो देशों उत्तरी यमन और दक्षिण यमन में बंट गया और आज वहां की जो हालत है उसे हम सब जानते हैं कभी दुनिया के सबसे विकसित देशों में गिने जाने वाला यमन आज विश्व का सबसे गरीब देश है विश्व को अनाज सप्लाई करने वाले इस देश के पास खाने के लिए अनाज नहीं है 

यमन से हमारे देश के संबंध बहुत पुराने हैं यहां तक कि सैकड़ों वर्ष से यमन के लोग भारत में और भारतीय लोग यमन में रहते आए हैं रहन-सहन पहनावे और आदतें मिलती जुलती हैं 


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