Monday, 16 October 2023

यह एक प्रभावशाली भविष्यवाणी थी जो ताक़त में चूर विश्व शक्तियों के कानों तक नहीं पहुँची...

1986  यूनाइट नेशन में  यासिर अराफात  एक हाथ मे बन्दूक और एक हाथ मे जैतून की साख पकड़े खड़े थे और विश्व से आह्वाहन कर रहे थे कि मेरे हाथ से यह जैतून की साख गिरने मत देना " 
यह एक  प्रभावशाली भविष्यवाणी थी  जो  ताक़त में चूर विश्व शक्तियों के कानों तक नहीं पहुँची...

लेकिन यासिर अराफात ने पैलेस्टाइन और खुद को संघर्ष से दूर ही रखा और शांतिपूर्ण रास्ता के लिए प्रयास करते रहे ....... लेकिन यह शांतिपूर्ण प्रयास इज़राइल की नज़र में इतने  कमज़ोर पर्याय थे 
कि  इज़राइल में एक खुदकुश धमाका होता है और  नतीज़े में  इज़राइल के टैंक रामल्ला में बेधड़क घुस जाते हैं और लाऊड स्पीकर पर धमकियां देते हैं कि कोई फिलिस्तीनी अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा ..... डोर टू डोर तलाशी ली जाएगी ।
तत्कालीन इज़राइल प्रधानमंत्री #एरियल_शेरोन के आदेश पर IDF का एक जंगी हेलीकॉप्टर कमांडोज़ के साथ डाइरेक्ट यासिर अराफात के ऑफिस पर उतरता है और हाउस अरेस्ट कर लेता है 
प्रतिक्रिया में #अमेरिका प्रेसीडेंट #बुश यह कहता है इज़राइल को आत्मरक्षा का अधिकार है ।

सारे अधिकार जब इज़राइल के नाज़ायज़ वजूद के लिए रिजर्व कर दिए गए , इतना दमन और ज़िल्लत के बाद  फिलिस्तीनियों के पास मात्र विकल्प था कि वह इस ऑप्रेस के जवाब में रेसिस्टेंस (संघर्ष) को चुनें और  #हमास बन जाएं या फिर #पीस को चुनें और अपनी सरजमीं पर रिफ्यूजी बन जायें ...... 

यह तहरीर  उन दो ब्यानों  पर याद दहानी के तौर पर  लिखा गयी है  वेस्ट बैंक  सरबराह  महमूद अब्बास  कहते हैं कि  हमास फिलिस्तीन को रिप्रेजेंट नहीं करता 
और दूसरी तरफ  #गाज़ा स्थित फिलिस्तीनी अवाम  इज़राइल के ज़मीनी ऑपरेशन की धमकी के मद्दे नज़र  सड़को पर जमा हो जाती है कि हम अपने सिपाहियो (हमास) को इज़राइल टैंकों के सामने तन्हा नहीं छोड़ सकते ...... 

कनक्लूज़न पॉइंट यह है कि यासिर अराफात की जैतून की शाख को पश्चिम दुनियां के ऊँट चर गए  और फिलिस्तीनीओं ने  सीमित रिसोर्सेज के साथ  आर्मी के तौर पर खुद को बिल्डअप  किया।
अगर ऐसा नहीं किया  होता तो एरियल शेरोन की तरह नेतन्याहू  बिला झिझक महमूद अब्बास को कॉलर पकड़ कर #तेल_अबीब बुला लेता और #बाइडन भी बुश की तर्ज़ पर यही कहता कि सेल्फ डिफेंस नेतन्याहू का राइट है 

लेकिन दुनिया गवाह हैं कि जैसे  इज़राइल टैंक बे झिझक रामल्ला में घुसकर फिलिस्तीनियों को जलील किये थे , वही  इज़राइल मिलिट्री   गाज़ा में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही  है?
यह एक स्पष्ट सन्देश है 

More power to you palestine 🤲 🇦🇪

No comments:

Post a Comment

क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी।

क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी। वह प्राचीन मिस्र की भाषा जानत...