Tuesday, 17 October 2023

गरकद के पेड़ों के पीछे छुपने वाले आज कहाँ छुप रहे हैं"

"गरकद के पेड़ों के पीछे छुपने वाले आज कहाँ छुप रहे हैं"

गरक़द का पेड़ (Lycium,boxthorn), जैसे कई नामों से जाना जाता है दुनिया में इसकी 70 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं अलग-अलग देशों में कुछ अलग अलग तरह के हैं अफ्रीका वगैरह में और भी अलग है इस पेड़ को शज़र ए यहूद गूंगा दरख्त या  यहूद का पासबान दरख्त बरगद आम है 
गरकद एक जंगली पेड़ का नाम है जो कांटेदार झाड़ी की तरह होता है मदीना शरीफ का कब्रिस्तान जन्नतुल बकी का असल नाम बकी उल 
गरकद इसीलिए है कि जिस जगह यह कब्रिस्तान है पहले वह गरक़द की झाड़ियों का इलाका था जो मदीना के अगल-बगल सेहराई इलाकों में बहुत पाया जाता था 

यहूदियों ने सरकारी तौर पर इस पेड़ को कौमी और मजहबी पहचान दे दी है हम माने या ना माने यहूदी हमारे नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के फरमान को मानकर अपनी सल्तनत को वसी और जान बचाने के लिए इस पेड़ की खेती कर रहे हैं लेकिन वह यह भूल चुके हैं कि रब्बे कायनात ने इमाम मेंहदी अलैहिस्सलाम और सैय्यदना ईसा अला नबीअना अलैहिस्सलाम की शक्ल में यहूदियों की तबाही का सामान तैयार कर रखा है

यहूदियों को मुसलमानों से इतना डर है कि शायद यही वजह है इसराइल की हुकूमत पिछले 40 सालों से 

गरकद के पेड़ों को एक मिशन बनाकर लगवा रही है एक आंकड़े के मुताबिक इसराइल में 2010 तक 24 करोड़ गरक़द के पेड़ लगाए जा चुके हैं और इसराइल में चलने वाली ट्रेनों के दोनों तरफ तकरीबन 30 से 40 किलोमीटर तक लाइन पटरी के दाएं और बाएं तरफ सिर्फ गरक़द ही लगे हुए हैं ताकि जब फ़लस्तीनियों की तरफ से कोई राकेट या ग्रेनेड दागे जाएं तो वह उस से बच सकें इस मुहिम के पीछे एक मकसद तो यह है कि वह अपनी हिफाजत कर सकें

 दूसरी यह कि जितनी ज्यादा जगहों पर गरक़द के पेड़ लगेंगे उतनी जगह या जमीन वह अपने कब्जे में कर सकेंगे यहां एक बात मैं बता दूं कि यह पेड़ बेतुल मुकद्दस के जाफा दरवाजे के बाहर भी बड़े पैमाने पर लगाया गया है जहां हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम दज्जाल का क़त्ल करेंगे और उस जगह एयरपोर्ट भी तैयार किया जा रहा है

फ़लस्तीनी उलेमा ए इकराम का कहना है की खासकर इसराइल में बड़े पैमाने पर गरक़द का पेड़ लगाकर यहूदियों ने अल्लाह के नबी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पेशनगोई का वक्त करीब कर दिया है खैबर में शिकस्त खाने के बाद से अब तक इनके पास ना कोई मुल्क था और ना ही फौज लेकिन बीसवीं सदी में इन्होंने पहली मर्तबा एक मुल्क हासिल किया जबकि दज्जाल का खात्मा भी बेतुल मुकद्दस में होना है और मुमकिना तौर पर वह यहूद में से होगा तो हमें चाहिए कि हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैरवी करें उनकी सुन्नतों पर अमल करें 

नोट :सेव गरक़द के नाम से दुनिया में एक मुहिम चल रही है यहूदियों की जिसके एडवर्टाइज के लिए टी शर्ट कैप शर्ट बेल्ट बैग और बहुत सारे सामान बनते हैं और उसने पेड़ जो आपको टीशर्ट में दिख रहा होगा उसके पीछे 2 लोग छुपे हुए हैं यह ट्रेड है बताने का मकसद यहूदियों के बहुत काम आएगा

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