Tuesday, 24 October 2023

देखिए एक बात तो हमें यक़ीन करके चलना पड़ेगा कि अल्लाह की नुस़रत आती है और ज़रूर आती है...कब कैसे और किस शक्ल में बस इसकी समझ हमें नहीं और अगर समझ है भी तो यक़ीन कामिल नहीं

देखिए एक बात तो हमें यक़ीन करके चलना पड़ेगा कि अल्लाह की नुस़रत आती है और ज़रूर आती है...कब कैसे और किस शक्ल में बस इसकी समझ हमें नहीं और अगर समझ है भी तो यक़ीन कामिल नहीं..

अब ग़ज़्ज़ा से छोड़े गए दो ज़ईफ स़ह़यूनी क़ैदियों का ही मामला ले लें...क़ैदियों ने आज़ाद होने के बाद जो बयानात इंटरनेशनल मीडिया के सामने दिये हैं उस बयान के बाद से नितिनयाहू और उसका प्रोप्गैंडा मीडिया अपना सर धुन रहा है कि कहां इन नालायक़ों को मीडिया के सामने पेश कर के पिछले सत्रह दिनों से चलाए गए सारे नैरेटिव को ही मलियामेट कर दिया...

""जब हम ग़ज़्ज़ा पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने हमें बताया कि हम क़ुरआन पर यक़ीन रखते हैं इसलिए हमें कोई नुक़्सान नहीं पहुंचायेंगे उन्होंने हमें कहा..वह हमारे साथ वही सुलूक करेंगे जैसा वह अपने पड़ोसियों के साथ करते हैं हम पूरी तरह उनके देखभाल में थे..
एक पैरामेडिक और एक डॉक्टर आए और इस बात को यक़ीनी बनाया कि जो दवाएं हम पहले से लेते रहे हैं वह हमारे पास हमेशा मौजूद हों , वह स्वास्थ्य के पहलू में बहुत दिलचस्पी रखते थे और हमारे साथ एक डॉक्टर भी रख छोड़ा था , वह हर दो तीन दिनों बाद ये देखने के लिए आते थे कि हमारे साथ क्या हो रहा है वह ज़िम्मेदार लोग थे अपने साथ दवाएं ज़रूर लाते थे और अगर दवाएं एक जैसी ना होतीं तो उसी से मिलती जुलती दवाएं देते..
वह बहुत मेहरबान थे और इस बात को यक़ीनी बनाते थे कि हमने अच्छा खाया या नहीं , हमने उनका खाना भी खाया उन्होंने हमारे साथ अच्छा सुलूक किया उन्होंने हमें तवज्जो दी उनके साथ महिलाएं भी थीं जो जानती थीं कि औरतों की स्वास्थ्य सुरक्षा को कैसे ट्रीट किया जाना चाहिए और इस बात को यक़ीनी बनाया कि हमारे पास सब कुछ है , ह़मास ने हर चीज़ की मंस़ूबाबंदी बहुत पहले से ही कर रखी थी उन्होंने हमें शैम्पू और हेयर कंडीशनर समेत हमारे ज़रूरियात की हर चीज़ मुहैय्या कराई..IDF और शिन-बीट की ना-अहली ने हमें बहुत नुक़सान पहुंचाया..उन्होंने हमें ह़ुकूमत का निशाना बनाया""

यह थे उन दोनों क़ैदियों के मीडिया बयानात जो बीबीसी हिंदी वग़ैरह ने तो बहुत छोटी क्लिप में चलाया...नफ्सियाती जंग यह दूसरा मरह़ला है जिसे ग़ज़्ज़ा ने जीत के साथ शुरुआत की है..

अब इज़्राईली विश्लेषकों को भी पढ़ लीजिए..जो कह रहे हैं कि..क़ैदियों की प्रेस कांफ्रेंस इज़्राईली प्रोप्गैंडा के लिए तबाही लेकर आया है..

कान पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने इज़्राईली सार्वजनिक संबंध विशेषज्ञों का ह़वाला देते हुए कहा है कि.. यूशीवेड लेफिशटिज़ को कैमरों के सामने रखने का फ़ैस़ला एक अज़ीम ग़लती थी..

Haartez मशहूर इज़्राईली अख़बार..नितिनयाहू के अधिकारी के हवाले से लिखता है कि.. क़ैदियों के बयानात से हम अचंभित हैं और यह हमारे प्रोप्गैंडा मिशन को बहुत डैमेज करेगा..

अब क़ैदियों से हटकर कुछ देखते हैं...इज़्राईली करेंसी शैकल 40-वर्षों में अपने सबसे कमतर सतह़ पर पहुंच गई है..जबकि स़ह़यूनी मुरदारों की तादाद भी छुपाई जा रही है , यह तादाद तीन हज़ार से भी ऊपर पहुंच चुकी है , टूरिज्म सेक्टर लगभग तबाही के दहाने पर पहुंच गया है..
इज़्राईली इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र "अस्क़लान" लगभग तबाह हो चुका है , 
नफ़सियाती मरीज़ लगभग इज़्राईल के हर घर में पैदा हो गये हैं , पांच लाख से ज़्यादा स़ह़यूनियों के लिए ख़ेमा बस्ती बनाने की ज़रूरत पड़ गई है और यह तादाद बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है..

याद रखिए !! जंग कभी आसान नहीं होती किसी के लिए भी..वह चाहे जितना बड़ा तीसमारखाँ हो..

और यह भी याद रखिए !! तारीख़ में वही बहादुरी दर्ज की जाती है जो लहरों का सीना चीरकर कर मंज़िल तक पहुंचते हैं , 
लहरों के साथ बहकर तो लाशें भी अपना अंजाम भुगत लेती हैं...

रहे नाम मौला का...

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