इस्लाम और दुनिया के दूसरे धर्मों में एक बड़ा और सीधा सा फ़र्क यह भी है कि इस्लाम के नियम और इसके कानून एकदम फिक्स और अटल हैं। इस्लाम के बेसिक स्ट्रक्चर या बेसिक कानून में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
शराब का कारोबार चाहें जितना बड़ा हो, रियासत चाहें जितना रेवेन्यू उससे कमा ले और गरीबों में खर्च कर दे लेकिन इस्लाम में हराम है, मतलब हराम है।
सेम सेक्स में शादी हराम है, मतलब हराम है। कोई समझौता नहीं, कोई अमेंडमेंट नहीं।
पूरी दुनिया भी सेम सेक्स शादी के पक्ष में हो तब भी कयामत तक इस्लाम इसके विपक्ष में ही खड़ा मिलेगा।
बस यही इस्लाम है, एकजुट, पक्का, मजबूत रीढ़ के साथ। दूसरे धर्मों में बहुत सी अच्छी चीजें हो सकती हैं, लेकिन यह रीढ़ सिर्फ इस्लाम में है। बाकी तो हमने भारत के सबसे बड़े धर्म में भी देखा है सेम सेक्स मैरिज पंडित जी को कराते हुए, और अब पॉप भी इशारे दे ही रहे हैं। यह लोग दुनिया की डिमांड के हिसाब से अपने आपको एडजस्ट करेंगे, लेकिन हमारा रास्ता सीधा है, हमारी नींव मजबूत है, और सबसे ज़रूरी हमारी रीढ़ मजबूत है।
मुहम्मद सलo यह रीढ़ सिर्फ 23 साल की अपनी नबूवत में दे गए।
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