Saturday, 6 January 2024
LAKSHADWEEP ARCHIPELAGO
लक्ष्यद्वीप आइलैंड मलाबार कोस्ट से 450 किलोमीटर दूर है हिन्द महासागर और अरब सागर से मिलता हुए ये 36 द्वीप का समूह है.. इन 36 द्वीप में से सिर्फ 8 द्वीप ही बसें हुए हैँ जहाँ आबादी है बाक़ी के द्वीप निर्जन हैँ और वहाँ जाने की इजाज़त भी नहीं है..
लक्ष्यद्वीप जाने के लिए परमिट लेना पड़ता है चाहें आप भारतीय हों या विदेशी.. लक्ष्यद्वीप जाने के लिए सबसे आसान तरीक़ा कोची केरला से है यहाँ से दुरी भी कम है यहाँ जाने के लिए आप हवाई सफ़र भी कर सकते हैँ और क्रूज़ से भी जा सकते हैँ
अगत्ती आइलैंड पे एकमात्र एयरपोर्ट या रनवे है जो कोची से हवाई सफ़र को जोड़ता है अगर शिप से जा रहे तो ये आपको कावारत्ती पहुंचाए गा जो इस क्षेत्र की कैपिटल है और सब से बड़ा द्वीप है.. ये द्वीप आपस में स्टीमर और मोटर बोट हेलीकाप्टर से जुड़े हुए हैँ..
लक्ष्यद्वीप की आबादी में 99% मुस्लिम हैं अकेले कावारत्ती में 52 मस्जिदें हैँ जिनमें सब से पुरानी उजरा मस्जिद है जो 17वी शताब्दी में बनी.. यहाँ इस्लाम 662 CE में शैख़ उबाईदुल्लाह के साथ पहुंचा जो हज़रत अबु बक्र रज़िअल्लाह अन्हुम के वंशज़ में से थे.. इब्ने बतुता ने भी अपने सफ़रनामे में इन द्वीप का तफ़सील से ज़िक्र किया है..
अगत्ती करावात्ती के बाद हमें बंगाराम पसंद आया यहाँ के बीच टेंट में रहना अलग ही रोमांचकारी था..
इन आइलैंड की सब से बड़ी खूबी इनकी साफ़ सुथरी बीच हैँ दूधया सफ़ेद रेत से सजी हुई शीशे की तरहा साफ़ नीला फ़ेरोज़ी पानी.. यहाँ ढेरों वाटर स्पोर्ट्स का मज़ा लिया जा सकता स्कूबा डाइविंग सनोर्कलिंग राफ्टिंग वाटर बाइक बोटिंग इत्यादि..
अभी तक भारत सरकार ने इसको क्यों सही से यूटिलाईज़ नहीं किया ये समझ से परे है अगर आज़ाद भारत की सरकारों ने इसपे ध्यान दिया होता तो ये मालदीव को टक्कर दे रहा होता और विदेशी सेलानियों से भरा रहता.. देश के हज़ारों लोग लक्ष्यद्वीप को छोड़ कर मालदीव जाते हैँ जबकि मालदीव 800 किलोमीटर से ज़्यादा दूर है..
शायद अब भारत सरकार इस तरफ़ ध्यान देने जा रही क्योंकी प्रधानमंत्री का लक्ष्यद्वीप जाना ऐसा ही संकेत दे रहा.. मालदीव में भारत विरोधी सरकार बनना शायद प्रधानमंत्री का इधर जाने का ज़रिया बना अब मालदीव के सबटीट्यूट के तौर पे शायद इसको प्रचारित और विकसित किया जाये प्रधानमंत्री की सनोर्कलिंग इसी तरफ़ ईशारा कर रही
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