Tuesday, 13 February 2024

नौबत यह आ गयी कि जायनिस्टों को अब जादू टोने और शैतानी अमल का सहारा बाकी है

नौबत यह आ गयी कि जायनिस्टों को अब जादू टोने और शैतानी अमल का सहारा बाकी है ...... लेकिन क्या आप इसे हल्के में ले रहे हैं ? या इसे कोई मामूली अंधविश्वास या शैतानी अमल समझते हैं फिर आप दुनिया के सबसे खतरनाक क़दीम तरीन #Kabbalah जादू की पुर असरार तारीख़ से अनजान हैं कुछ तहक़ीक़ करने वाले इसकी शुरुआत #बेबीलोनिया सिविलाइजेशन से जोड़ते हैं , लेकिन इसके नुमायाँ सुबूत हज़रत मूसा अलै. के दौरे नवुब्बत या उससे पहले #मिस्र में मौजूद थे ,, यह बात गैर मुमकिन नहीं है कि हज़रत मूसा अलै. की पैदाइश और फ़िरऔन के कत्ल की भविष्यवाणी करने वाले कबाला जादूगर थे , मशहूर ज़माना सामरी जादूगर भी कबाला के सिफली इल्म में माहिर था और मूसा अलै. के सामने लकड़ी का सांप बनाने वाले भी कबाला इल्म रखते थे । जब मूसा अलै. बनू इस्राइल को अपने साथ यरूशलेम से मिस्र ले गए तब बनू इस्राइल इस इल्म में अहले मिस्र से भी बहुत आगे निकल गए , कबाला जादू की तहक़ीक़ और इल्म पर किताबें लिखी गईं , जो कि बनू इस्राइल के नज़दीक मुक़द्दस क़िताबों का दर्जा रखती थीं , इसके माहिरीन ने वक़्तन फ वक़्तन कबाला की मदद से न जाने कितने मक़सद अचीव किये गए होंगे मिडिएवल टाइम में जब मुसलमानों के ख़िलाफ़ क्रुसेड जंगों का आगाज़ हुआ तब 1153 में " नाइट टेम्पलर्स" नामक तारीख के खतरनाक क्रूसेड योद्धाओं के संगठन बना , इसका संस्थापक " ह्यूज डी पेन्स " और पहला ग्रांड मास्टर " बर्नाड डी ट्रेमले " जिसके नेतृत्व में सबसे पहली जंग एस्केलन क़िले (मिस्र) की घेराबंदी थी ........... नाइट टेम्पलर्स की दो विंग थीं एक जंगजू थे और दूसरे वह आलिम थे जो इनकी रुहानी जरूरतों को पूरा करते थे , इनका एक मक़सद कबाला जादू मुक़द्दस किताबों को वापस हासिल करना था जो कि यूनानी हमले में टेम्पल ऑफ सोलेमान के मलवे में दफ़न हो गयी थीं क्रुसेडर्स के फिलिस्तीन फ़तेह के बाद नाइट टेम्पलर्स ने यरूशलेम के टेम्पल माउंट पर अपना हेडक्वार्टर बनाया और सम्भताः किताबों को हासिल कर लिया था ..... नाइट टेम्पलर्स योरोप में मक़बूल और आकूत दौलत और ताक़तवर जमा कर चुके थे कि योरोपीयन राजाओं को भी ख़तरा महसूस होने लगा था । इनका एक बैंकिंग सिस्टम था , रूहानी तहक़ीक़ की ज़मींदोज़ प्रयोगशालाएँ थीं , जंगजू , हसीश और राजाओं को वश में करने लिए हसीन तरीन माहिर औरतें थीं । फ्रांस किंग फिलिप lV मौके की तलाश में था और मौका पाते ही पॉप क्लीमेंट द्वारा 18 मार्च 1314 ई को नाइट टेम्पलर्स संगठन को शैतान की पूजा , विधर्मी घोषित करके भंग कर दिया और जिंदा जलाने के आदेश जारी कर दिए । लिहाज़ा ग्रांड मास्टर जैक्स डी मोले और जिओफ्रोई डी चर्नी दोनों को ज़िंदा जला दिया गया । डी मोले की आखरी इच्छा थी कि उसे जलाने के लिए जब बांधा जाए तब उसके दोनों हाथ खुले हो , और जब उसे जलाया गया तब उसने दोनों हाथ जोड़कर यह श्राप दिया कि किंग फिलिप और पॉप क्लीमेंट दोनों एक साल के अंदर मर जायेंगे , मैं जल्द ही इनसे अपने खुदा के सामने मिलूंगा , और ऐसा ही हुआ , दोनों की एक साल के अंदर मौत हो गयी ...... आम नाइट टेम्पलर्स को सादा जिंदगी गुजारने के वादे के साथ माफी दे दी गयी ,, सारी सम्पत्ति जब्त करली गयी ...... लेकिन अगले बीस साल के अंदर वह रहिसस्य मय तौर पर तरक़्क़ी कर गए । वह बज़ाहिर कोई संगठन नहीं हैं , लेकिन कई इंटरनेशनल तहक़ीक़दान का यह दावा महफूज़ है कि काबाला जादूगर जो कि मिडिएवल नाइट टेम्पलर्स थे , अब IMF और संगठित रूप से फ्रीमेशनरी के तौर पर मौजूद हैं । इलूमेनिटी , IMF , फ्रीमेशनरी के वज़ूद और शैतानी अज़्म को भले बेश्तर लोग एक इल्यूजन या डिस्प्यूट मानते हों । लेकिन काबाला जादू और नाइट टेम्पलर्स की पुख़्ता और तर्क सम्मत हिस्ट्री मौजूद है , सेहुनी मोस्ट वान्टेड " यहिया सिनवर" के खिलाफ शैतानी अमल काबाला जादू करते हुए एक रील वाईरल हुई , ... जिससे यह रूहानी और शैतानी हिस्ट्री एक्सप्लोर करने का मौका मिला , जिसकी बाक़ायदा तारीख है और जो मौजूदा सिविलाइजेशन के पैरलल आज भी चल रही है । लेकिन अय्यूबी रह. की क़यादत में जब मुसलमानों ने फिलिस्तीन फ़तेह किया तब तारीख़ ने काबाला जादू के माहिरीन की लाशों को चील कौओं को खाते देखा है ,, 1189 में सलाहउद्दीन रह. ने ग्रांड मास्टर " जेरार्ड डी राइटफोर्ड " का सर काट कर यह पैग़ाम दे दिया कि अल्लाह के सिपाह इन जादुगरों के शैतानी असरात से पाक हैं ,
नाइट टेम्पलर्स और टेम्पल माउंट यरूशलेम में हेडक्वार्टर की पेंटिंग लोग हंस रहे होगे। जबकि इसका तोड़ हमारे पास भी मौजूद है। हमारे पास भी अल्लाह की क़ुर्बत हासिल कर रूहानियत के दरवाज़े खोलने के नुस्ख़े मौजूद हैं लेकिन मुसलमान ये करना ही नही चाहता। और तो और जो हमारे बुज़ुर्गों ने करामात दिखाए थे वो इसी रूहानी दरवाजे को पार कर के दिखाए थे। लेकिन अब अगर आप कहें कि ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने सिर्फ़ अपने खड़ाऊं से जयपाल जादूगर के जादू का इलाज कर दिया था तो मुसलमान लोग ही इस बात पर हंसते हैं। इस्लाम मे हर जादू का तोड़ है। हमारे पास ऐसे ऐसे नुस्ख़े मौजूद हैं जिनके ज़रिए इंसान टेलिपोर्ट तक हो सकता है लेकिन उसके लिए अल्लाह पर कामिल यक़ीन रखना पड़ेगा, तवक्कल वाला इंसान चाहिए मुत्तक़ी, परहेज़गार होना पड़ेगा उस्ताद ए कामिल ढूंढना पड़ेगा आजमाइशों के दौर से निकलना पड़ेगा तब ये इल्म हासिल होगा। ख़ैर मुसलमान नही मानेंगे।

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