तालीम_और_मुसलमान
तालीम के मैदान में मुसलमानों ने बहुत अहम किरदार निभाया है दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी का नक्शा भी एक मुस्लिम औरत ने ही दिया..!
तारिख़ में पढ़ेंगे तो आपको मिलेगा की कई सदी तक मुसलमानों ने तालीम के मैदान में किसी और को टिकने नही दिया ,, साइंस , मेडिकल , इंजीनियरिंग हर फील्ड में अपना लोहा मनवाया..!
लेकिन यह कुदरत का निज़ाम है कि रात के बाद सुबह होती है , जवानी के बाद बुढापा आता है और उरूज के बाद ज़वाल आता है..!
मुसलमानों पर भी ज़वाल आया और इस ज़वाल ने सदियों ने चली आ रही सल्तनत का इख़्तेताम कर दिया. मुसलमान हर तरह से टूट गए तालीम , सियासत , तिजारत..!
लेकिन पिछले 15 से 20 सालों पर गौर व फिक्र किया जाये तो मुसलमानों के हालात बेहतर हुए है तालीम , सियासत , तिजारत हर फील्ड में बेहतरी हासिल हुई है।
टॉप 200 यूनिवर्सिटी में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का शुमार होने लगा है आज आप अपने आसपास गौर कीजियेगा तो पाइयेगा की मुस्लिम मोहल्लों में हर साल 10 बच्चे बोर्ड का पेपर देते है।
अब भी अगर कोई कह रहा है कि मुसलमान तालीम के मैदान में पीछे है तो वह आपको हीनभावना का शिकार बना रहा है..
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