Wednesday, 27 December 2023

सुल्तान_सलाहुद्दीन_अय्युबी_की_दास्तान


आपलोग से गुजारिश है कि पूरा पढ़ना🙏


इस्लाम में बहुत कम ऐसे हुक्मरान गुजरे हैं जिनको मुसलमानों के साथ_साथ गैर मुस्लिम भी इज्जत की निगाहों से देखते हैं ऐसे ही हुक्मरानों में सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी रहमतुल्लाह अलैहि एक ऐसा नाम है जो इनकी बहादुरी रंगीली और दानिश मंदी की मिसाल दुश्मनाने इस्लाम भी दिया करते है अक्सर मुसलमानों सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी रहमतुल्लाह अलैहि का नाम तो जरूर सुना होगा मगर अफसोस बहुत कम मुसलमान ऐसे हैं जो इस्लाम के इस मुजाहिद के इतिहास के बारे में जानते होंगे क्योंकि आज का मुसलमान इस्लाम की हीरो से ज्यादा हॉलीवुड बॉलीवुड के हीरो के बारे में जानने की दिलचस्पी रखता है 😭


इनका पूरा नाम सुल्तान सलाहुद्दीन युसूफ था यह 1138 ईस्वी में मौजूदा इराक की #तकरीर शहर में पैदा हुए थे इनके सल्तनत को अयूबी सल्तनत कहा जाता है इनकी मौजूदगी में मुसलमानों ने मिस्त्र, (शाम) यानी सीरिया, यमन, ईराक वगैरह मुल्कों को फतह किया इस्लाम में सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी का इतना ऊंचा माकाम इसलिए है क्योंकि यह वही बहादुर मूसा ही थे जिन्होंने जालिम ईसाइयों से मुसलमानों के बैतुल मुक़द्दस  को फतह किया था इसीलिए इन्हें बैतूल मुकद्दस का विजेता भी कहा जाता है ।


सुल्तान सलाहुद्दीन के बारे में जानने के लिए पहले हमें तारीख में थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा।


634 ईस्वी - 645 ईसवी में हजरत उमर रजि अल्लाहु ताला अन्हु की खिलाफत में मुसलमानों ने सीरिया और मिश्र को फतह कर लिया था इसमें सबसे बड़ी फतेह थी बैतूल मुकद्दस की फतेह फिर संधू की सल्तनत जब कमजोर पड़ी तो मुसलमानों की छोटी_छोटी हुकुमत तो मिट गए जिसका फायदा उठाकर ईसाइयों ने बैतूल मुक़द्दस मुसलमानों की हात से छीन लिया, मुसलमानों के हारने की बड़ी वजह यह थी कि वह फिरको में पड़ चुके थे जैसा कि आज भी मुसलमान फिरका मे पड़े हुए है 

सन 1099 ईस्वी में ईसाइयों ने फलस्तीन के साथ बैतूल मध्य इस पर भी कब्जा कर लिया और मुसलमानों के साथ जुल्म की हदें पार कर डाली यह जालिम इसाई फौजियों ने मुसलमान औरतों और बच्चों समेत 70 हजार मुसलमानों को शहीद किया पूरा फलस्तीन मुसलमानों के खून से लाल हो चुका था जब फलस्तीन पर ईसाइयों का कब्जा हो गया तो पूरी इस्लामी दुनिया में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि फलस्तीन इस्लामी दुनिया का दिल है बैतूल मुकद्दस मुसलमानों का अव्वल कीबला है फिर अलग_अलग वक्त पर कई मुस्लिम हुक्मरानों ने बैतूल मुकद्दस को आजाद कराने की कई कोशिशें की मगर वह कामयाब ना हो सके नूरुद्दीन जंगी वह हुक्मरान थे जिन्होंने बैतूल मुकद्दस को फतेह करने का जिम्मेदारी उठाया उनकी ख्वाहिश थी कि  बैतूल मुकद्दस फतेह के बाद मस्जिदे अक्सा में अपने हाथ से यह मिम्बर लगाऊं मगर अल्लाह को यह मंजूर नहीं था पता है बैतुल मुक़द्दस की फतेह से पहले ही उनका देहांत हो गया था सुल्तान सलाहुद्दीन नूरुद्दीन जंगी की फौज में एक फौजी थे। मिस्र को जिस फौज ने फतह किया था उसमें सलाउद्दीन अयूबी मौजूद थे और इस फ़ौज की कमान को इनके ही हाथ में थी । सलाहुद्दीन अयूबी के चाचा थी मिश्र फतेह होने के बाद 1164 ईस्वी में सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी को उनकी बहादुरी और तेज तहनियत को देखते हुए मिस्र का गवर्नर बना दिया गया। इन्होंने अपनी बहादुरी और जंगी चलाकी से अपनी अकल के बलबूते पर उसी वक्त यमन को भी फतेह कर लिया था नूरुद्दीन जंगी का इंतकाल हुआ तो उनका कोई लायक उत्तराधिकारी ना था इसलिए उन्होंने अपनी पूरी सल्तनत पर सलाहुद्दीन अयूबी के नाम कर दिया और इस वक्त सलाहुद्दीन की उम्र महज 21 साल ही थी इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सलाहुद्दीन अय्युबी किस कदर बहादुर और बेहतरीन हुक्मरानी के मालिक थे सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी ने बैतूल मुकद्दस को फतेह करने को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था इनके दिलो दिमाग में इस्लाम का जज्बा भरा पड़ा था इस्लाम के लिए कुछ कर गुजरने का इन्होंने ठान लिया था और फिर अल्लाह  ने मिस्र के हुक्मरान के तौर पर इनको पावर भी दे दी सलाहुद्दीन अय्युबी जब मिश्र पहुंचे तो उन्होंने देखा कि ईसाइयों ने मिस्र को बर्बाद करके रख दिया है यहां के लोग शराब में धुत रहते जानकारी बिल्कुल आम हो चुकी थी मिस्र की हुकूमत में कुछ मुसलमान ऐसे भी थे जो ईसाइयों के एजेंट थे  सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी को इन दोनों मुसीबतों से लड़ना था पहला तो शराब और जनाकारी को मुल्क से खत्म करना जो कि इतना आसान नहीं था और दूसरा और गद्दार मुसलमानों मुनाफिक को ढूंढ निकालना जो ईसाइयों की एजेंट बन बैठे थे और उधर बैतुल मुक़द्दस की फतेह करने के लिए सलीबीयो से उन्हे जंग जारी रखनी थी तो तब सलाउद्दीन अय्युबी मिस्र में दाखिल हुए तो वहां का जो सबसे बड़ा फौजी कमांडर था जिसका नाम नाती था वह सलाउद्दीन अय्युबी को देखकर मुस्कुराता है क्योंकि यह पक्का ईसाइयों का एजेंट था और उन्हीं के लिए मिस्र में काम कर रहा था तो उसने सब देखा कि 22 साल का नौजवान दीन ए इस्लाम की बातें कर रहा है बैतूल मुक़द्दस फतह करने की बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है 


जब कमांडर नाती अपने सभी शैतानी साथियों के साथ महफिल में बैठा तो उसके साथियों ने कहा कि अब तो तुम्हारी इरादे कामयाब ना होंगे क्योंकि अब एक सच्चा मुसलमान हुक्मरान तुम पर हाकिम हो गया है तो उस कमांडर नाती ने हंसकर कहा कि अरे यह तो बच्चा है हम इस बच्चे को पाल लेंगे मैं देख लूंगा। एक शख्स बोला सलाहुद्दीन अय्युबी  को लेकर बहुत जल्द पता चल गया कि यह बच्चा नहीं यह नाको चने चबाने वाला जूता है। दोस्तो उस दौर में ईसाई, मुसलमानों से जंग तलवारों की ताकत पर ना जीत पाते तो मुसलमानों की फौज में अपने एजेंट भेज देते और दो चीजों से मुस्लिम हुक्मरानों को अपने वश में करने की साजिश करके या दूसरी खूबसूरत लड़कियां इसाई हुक्मरान अपनी ही बेटियों को मुस्लिम हुक्मरानों के खेमे में यह कह कर भेज देते कि जाओ तुम उसके साथ कैसे भी करके जीना करो उसको अपनी तरफ लुभाओ युरुस्लम (ईसाई भगवान)  तुम्हें सीधे जन्नत देगा और इन ईसाइयों के इस शैतानी साजिश का शिकार हो जाते  जब बैतूल मुक़द्दस के इसाई हुक्मरानों को पता चला कि सुल्तान सलाहुद्दीन नाम का तुर्क लड़का बैतूल मुक़द्दस फतह करने आया है तो उन ईसाइयों ने सलाहुद्दीन अयूबी के साथ भी यही चाल चली कमांडर नाती जो मुसलमानों के भेष में ईसाइयों का एजेंट था उसने कई मर्तबा सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी को अलग अलग महफिलों में बहाने से शराब पिलाने की कोशिश की मगर सलाहुद्दीन अयूबी पक्के मुस्लिम थे वह कहते कि यह मुस्लिम देश है जहां शराब पीना हराम है और मैं तो बिल्कुल भी शराब नहीं पियूंगा नाती जी को लगा कि सलाहुद्दीन तो शराब को हाथ भी नहीं लगाता है तो उसने लड़की वाला फार्मूला अपनाया एक रात को ना जीने एक खूबसूरत लड़की को इस काम के लिए तैयार कर लिया फिर सुल्तान सलाहुद्दीन के पास आकर बोला कि सुल्तान एक लड़की परेशान है बहुत दूर से आई है आप से बड़ी उम्मीदें लगाई हुई है वह आपसे मिलना चाहती है सुल्तान सलाहुद्दीन ने कहा कि ठीक है बुला लो नाती ने कहा नहीं नहीं सुल्तान वह आपसे अकेले में ही अपनी परेशानी बताने की जिद कर रही है तब सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी मुस्कुराए क्योंकि उनको अंदाजा हो गया था कि यह बदबख्त मुझे एक इस साजिश में फंसाना चाहता है मगर सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी ने कहा कि ठीक है मैं मेरे खेमे में जा रहा हूँ लड़की को भेज देना फिर उस लड़की को भेजा गया हालांकि पूरी प्लानिंग यह थी कि उस लड़की को कहा गया था कि तुम जाओ और किसी न किसी तरह सुल्तान के साथ गलत हरकतें करो और सुल्तान को अपनी तरफ माइल करो और अगर तुम सुल्तान को एक गिलास भी शराब पिला दो तो जो तुम मांगोगे वह तुम्हें दिया जाएगा मगर जब लड़की अंदर गई तो सलाहुद्दीन अयूबी ने उसे देखते ही अपने कंधे से चादर उतारी और उस लड़की को दे दी और कहा कि इससे अपना बदन ढक लो इस अमल से वह लड़की अपने आप पर शर्मिंदा हो गई सलाउद्दीन अय्युबी ने उससे पूछा कि तुम्हारे मां बाप कौन है तो वह लड़की इस सवाल का जवाब ना दे सकी क्योंकि इस स्लेबियन ईसाई ऐसी लड़कियों को बचपन में ही कहीं से अगवा कर लिया करते थे और इस तरह के कामों के लिए उनकी खास परवरिश किया करते थे फिर वह लड़की रोते हुए बोली के इन लोगों ने मुझे आपके साथ गलत हरकतें करने के लिए भेजा था सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी मुस्कुराए और कहा कि जाओ उनसे कह दो कि जो काम तुमने कहा था वह मैंने कर दिया जब वह लड़की अपने सरदारों के पास गई तो अगले ही दिन नाती उठा और शोर मचाने लगा कि देखो हमारा सुल्तान तो शराबी है वह तो लड़कियों के साथ जिनाकारी करता है जब सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी अपने खेमे से बाहर आए तो लोगों में उनकी बातें चल रही थी सुल्तान ने कहा कि ज़रा उस लड़की को तो पूछ लो कि रात को क्या हुआ था जब लड़की को बुलाया गया तो उस लड़की ने सबके सामने कहा कि जिस खुदा को मैं मानती हूं उसकी कसम मेरे सलाहुद्दीन जैसा बहादुर और शरीफ इंसान आज तक नहीं देखा मैं रात भर उनके साथ रही मगर सुल्तान ने एक गलत निघा भी मुझ पर न डाली फिर उस सलेबियन एजेंट नाती का काला मुंह हुआ और अपने गलत इरादों को अंजाम ना दे सका

भाइयो यह किरदार था सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी का और एक किरदार आज हमारा है जो व्हाट्सएप और फेसबुक सिर्फ इसलिए चलाते हैं ताकि लड़कियों को चैट की जाए 😭

जब ईसाइयों की शराब और लड़की वाली साजिश काम ना आए तो इन्होंने सुल्तान को कत्ल करने की तीसरी साजिश रचने शुरू कर दी इन लोगों ने हसन मीम (Assassin) से मदद मांगी जो दुनिया का बदतरीन इंसान था कहता तो था अपने आपको मुसलमान था मगर असल में मुस्लिम वाली कोई बात ही नहीं थी उसमें अपने लोगों की एक ऐसी फौज बना रखी थी जो बड़े बड़े लोगों को किसी भी हालत में मारने की ताकत रखती थी और आज हम इस फौज को Assassins के नाम से जानते हैं अलग अलग वक्त पर तीन बार ऐसी Assassins ने सुल्तान सलाहुद्दीन पर हमला किया मगर वह हर बार इन लोगों को मार गिराते। यहां तक कि Assassins सुल्तान सलाहुद्दीन  की फौज में उनके बॉडीगार्ड के रूप में भी शामिल हो गए थे और एक दोपहर जब सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी अपने खेमे में सो रहे थे तब इन Assassins ने मौका पाकर सुल्तान पर हमला कर दिया मगर सुल्तानी नींद में भी जंग की हालत में होते थे हमला निशाने पर नहीं लगा तो सुल्तान की आंख खुल गई और एक पल में ही सुल्तान ने जान लिया कि यह थी डायन ऐसी चीज है तो सुल्तान ने उसी वक्त अपने मुह से उस ज़ालिम के सिर पर ऐसी चोट मारी कि उस ज़ालिम की हड्डी टूटने की आवाज आई और वह वहीं गिर पड़ा । इतना परेशान हो चुके थे कि ऐसे सुल्तान से कैसे निपटा जाए जब सुल्तान सलाहुद्दीन ने मिस्र में अपनी हुकूमत मजबूत कर ली तो उन्होंने बेहतर मस्जिद की तरफ चढ़ाई करने का इरादा किया इनमें जिहाद का जोश कूट कूट कर भरा हुआ था उनकी जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद था वह था बैतूल मुक़द्दस की फतेह हितेन के मैदान में मुसलमानों की ईसाइयों से भीषण जंग हुई सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी की फौज ईसाइयों का सफाया करते हुए बैतूल मुकद्दस की ओर बढ़ रही थी ईसाइयों के फौजी मारे जा रहे थे यहां तक कि खुद सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी दुश्मनों के बीच जाकर दुश्मनों के सर कलम कर रहे थे हजारों ईसाइयों को संग में कत्ल कर दिया गया और कई हजारों को गिरफ्तार कर लिया गया सुल्तान सलाउद्दीन ने आगे बढ़कर 2 अक्टूबर 1187 ईस्वी को बैतूल मुक़द्दस फतह कर इस्लाम का झंडा गाड़ दिया और पूरे फलस्तीन से मसीही हुकूमत का खात्मा हो गया  यह साबित कर दिया कि वह इस वक्त की दुनिया में सबसे ताकतवर हुक्मरान है। सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी एक बहादुर बुद्धिमान और एनी दर सिपहसालार तो थे ही इसके साथ ही वे बहुत बड़े दरिया दिल इंसान भी थे, सुल्तान सलाहुद्दीन का कॉल है जिस कौम के नौजवान बेदार हो जाये 


उस कौम को कोई शिकस्त नहीं दे सकता हम लोगो को बेदार होने की सख्त जरूरत है


अगर हम उम्मत बन जाएँ 


तो, टीपू सुल्तान भी हम,

सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी भी हम,नूरुद्दीन जंगी भी हम,एर्ताग्रूल गाज़ी भी हम,और महमूद गजनवी भी हम ही होंगे।


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