Sunday, 31 December 2023

चैपल ऑफ़ बोन्स (कैपेला डॉस ओसोस)

चैपल ऑफ़ बोन्स (कैपेला डॉस ओसोस) पुर्तगाल के एवोरा में स्थित एक छोटा चैपल है. यह चैपल, सेंट फ़्रांसिस चर्च के प्रवेश द्वार के पास है. इस चैपल की दीवारों पर मानव खोपड़ियों और हड्डियों से सजावट की गई है. चेक गणराज्य में भी एक चर्च है, जिसे 'चर्च ऑफ़ बोन्स' के नाम से जाना जाता है. यह चर्च 1870 में बना था. इस चर्च में 40,000 से ज़्यादा मानव कंकालों को कलात्मक तरीके से सजाया गया है. कहते हैं कि पहले यह जगह शवों को अस्थाई रूप से रखने के लिए इस्तेमाल की जाती थी. 14वीं और 15वीं शताब्दी में इस जगह पर प्लेग और युद्ध का आतंक फैल गया था. इस दौरान हज़ारों लोगों की मौत हो गई और उन्हें सेडलेक में ही दफ़नाया जाने लगा. जब यहां जगह नहीं बची, तो संतों ने कब्रों से हड्डियां निकालकर ऑस्युअरी में रख दीं. ऑस्युअरी वह जगह होती है, जहां कब्र से कंकालों को निकालकर एक साथ रखा जाता है.

Saturday, 30 December 2023

समुद्र में 1.5 मिलियन किलोमीटर लंबी केबल का जाल बिछा हुआ है. इन केबल्स ज़रिये पूरी दुनिया में हाई स्पीड वाले इंटरनेट आप तक पहुंच रहा है . 1971 में अमेरिकी रक्षा विभाग अनुसंधान (DARPA) ने सीक्रेट फाइल्स ट्रांसफर और सुरक्षित कम्युनिकेशन की ज़रूरत के मद्दे नज़र इंटरनेट की खोज की थी दुनिया के बड़े बिजनेस ग्रुप्स ने इसमें कमर्शियल सम्भावनाओं को देखते हुए इन्वेस्टमेंट किया और आज बैंकिंग से लेकर एजुकेशन , सोशल मिडिया , मेडिकल , सभी ऑनलाईन सर्विसेज , शेयर मार्केटिंग , प्रसारण , हत्ता कि इस वक़्त कम्युनिकेशन और बिजनेस पूरी तरह से इंटरनेट पर डिपेंड है । ऐसी ही एक लाइन है एशिया-अफ्रीका-यूरोप-1 (AAE-1) जो कि लाल सागर से गुजरती है जिसका एक हिस्सा 2022 में डैमेज़ होने से दुनिया को तगड़ा झटका लगा था , कुछ घन्टो के लिए आधी दुनिया में इंटरनेट बंद हो गया था ..... #Yemen प्रो हौथी न्यूज़ चैनल ने फ्रेश वॉर्निंग दी है कि अगर गाज़ा में नरसंहार बंद नहीं हुआ तो आगे वह Red Sea से गुजरने वाली फाइबर ऑप्टिक सबमरीन केबल को तबाह कर देंगे । आप समझ सकते हैं , कितना कुछ प्रभावित हो सकता है । सच है कि मुस्लिम देशों ने अपनी स्ट्रेटेजिक लोकेशंस को पॉवर के तौर पर यूटिलाइज नहीं किया , यमन अगर यूटिलाइज कर सका तो दुनिया का पॉवर बैलेंस हिला सकता है ।

Friday, 29 December 2023

17TH YOUM E SHAHADAT OF SADDAM HUSSAIN

30 दिसंबर 2006 को अमेरिका ईरान allies ने सद्दाम हूसैन को फाँसी पे चढ़ा कर शहीद कर दिया.. 2003 में झूठे इलज़ाम का सहारा लेकर अमेरिका allies ईराक़ पे हमला करता है ईराक़ को तबाह और बर्बाद करता है सद्दाम हुसैन के ख़ानदान का क़त्ल करता है सद्दाम को गिरफ़्तार कर के झूठा मुक़ादमा चलाया जाता है अमेरिका ईरान समर्थित सरकार और अदालत बिना इलज़ाम साबित किये सद्दाम को फाँसी की सज़ा सुना देतें हैँ.. 30 दिसंबर की सुबह सद्दाम को फाँसी देकर शहीद कर दिया जाता है.. उनकी शहादत के बाद उनके क़ातिल एक वीडियो जारी करते हैँ जिसमें उनकी पिछली रात फाँसी से पहले किये गए उनके कामों को दिखाया गया था.. सद्दाम तहाज्जुद के वक़्त उठते हैँ ग़ुस्ल करते हैँ नमाज़ पढ़ते हैँ क़ुरान की तिलावत करते हैँ रूटीन के मुताबिक़ वर्ज़ीश करते हैँ.. इतने में उनके क़ातिलों की टीम पहुँच जाती है और वह उनके साथ फाँसी घाट जाते हैँ वहाँ अपने क़ातिलो से दुआ सलाम करते हाथ मिलाते और फाँसी दिए जाने का तरीक़ा पूछते हैँ काले ग़ीलाफ़ को चेहरे पे चढ़ाने को मना करते हैँ लेकिन ग़ीलाफ़ ज़रूरी है ये जान कर कलमा ए शहादत पढ़ते हुए ग़ीलाफ़ पहन कर फाँसी के फन्दे से झूल कर शहीद हो जाते हैँ.. इस वीडियो का उल्टा असर हुआ अमेरिका allies के झूठे प्रोपेगंडा से जो मुसलमान सद्दाम को विलेन समझ रहे थे इस वीडियो के बाद सद्दाम उनके हीरो बन गए उन्हीं ने सद्दाम की अज़मत में अपने सरों को ख़म कर दिया 1991 के बाद एक बार फ़िर सद्दाम मुस्लिम उम्मत के हीरो थे.. ईमान वाली की दिली तमन्ना होती है और उसके ईमान की मेराज होती होती के जिस वक़्त उसकी रूह क़ब्ज़ की जाये उसकी ऑंखें आख़िरी वक़्त देख रही हों आख़िरी लम्हें आख़िरी सांसे हों तो उसके ज़बान से निकलने वाले लफ़्ज़ अल्लाह की बड़ाई बयान कर रहे हों.. सद्दाम आख़िरी लम्हों में आख़िरी लफ़्ज़ों में अल्लाह की किबरियाई और रसूल की रिसालत की गवाही देते हुए शहीद हुए.. और एक बार फ़िर उम्मत के हीरो बन गए 17 साल बाद भी उनका heroism क़ायम है दायम है और आगे भी बरक़ारार रहेगा

Wednesday, 27 December 2023

इस्लाम_की_बुनियाद_पाँच_चीज़ों_पर_रखी_गयी_है

 


रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया की इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर रखी गयी है


 لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ ٱللَّٰهِ

1⃣ इस बात की गवाही देना की अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है और मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके ख़ास बंदे और रसूल हैं


2⃣ नमाज़ क़ायम रखना


3⃣ जक़ात देना


4⃣ हज करना


5⃣ माहे रमजान के रोजे रखना


(बुख़ारी शरीफ जिल्दे अव्वल सफ़ा 6)


हुज़ुर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया अगर किसी के घर के सामने नहर हो वह रोज़ (5) मर्तबा ग़ुस्ल करे तो क्या उसके बदन पर मैल रहेगा ? सहाबा ने अर्ज़ की नहीं फ़रमाया यही मिसाल पाँच ऩमाज़ो की है। अल्लाह तआला नमाज़ों के सबब सब खताओं को मिटा देता है और बंदा जब नमाज़ के लिए खड़ा होता है तो उसके लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। उसके लिए अल्लाह तआला के बीच के परदे हटा दिए जाते हैं और हूरें उसका इस्तक़बाल करती हैं। जब इन्सान सजदा करता है तो शैतान रोता हुआ भागता है और कहता है अफसोस कि इन्सान को सजदे का हुक्म हुआ उसने सजदा कर लिया उसको जन्नत मिली। मुझे सजदे का हुक्म हुआ मैंने इनकार किया और मुझे जहन्नुम मिली। और जब तुम्हारे बच्चे सात बरस के हो जाएँ तो उन्हें नमाज़ का हुक्म दो और जब दस (10) बरस के हो जाएँ तो मार के नमाज़ पढ़ाओ।


#⃣ (तिर्मिज़ी शरीफ जिल्दे 1 सफा 54 व इब्ने माजा शरीफ़ सफ़ा 58)


हज़रत अबुज़र गफ्फारी फ़रमाते हैं रसूलुल्लाह सल्ल्लाहो अलैहि वसल्लम सर्दियों के मौसम में बाहर तशरीफ ले गए। पतझड़ का मौसम था आप ने एक दरख्त की दो शाख पकड़कर कर उन्हें हिलाया पत्ते उनसे झड़ने लगे। आप ने फरमाया ऐ अबुजर मैंने अर्ज किया हाजिर हूँ। फ़रमाया जब मुसलमान बंदा नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह तआला की रज़ामंदी का इजहार करता है तो उसके गुनाह इस तरह गिरते हैं जैसे इस दरख्त के पत्ते झड़ते हैं।


(मिशकात शरीफ़ जिल्द अव्वल सफ़ा 58)।


रसूलुुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि 

वसल्लम ने फ़रमाया कि नमाज़ में मेरी आँखों की ठंडक रखी गई है और जन्नत की कुंजी नमाज़ है और नमाज़ की कुंजी तहारत है जिसने क़सदन (यानी बगैर किसी उज़र शरई के नमाज़ छोड़ दी) तो जहन्नुम के दरवाजे पर उसका नाम लिख दिया जाता है और जिसके नमाज नही उसका कोई दीन नहीं, नमाज़ दीन का सुतून है। क़यामत के दिन सबसे पहले बंदे से नमाज़ के बारे में पूछा जाएगा अगर उसकी नमाज़ें मुकम्मल हुईं तो उसके सारे आमाल क़ुबूल कर लिए जाएँगे और अगर नमाज़ मुकम्मल नहीं हुई तो उसके तमाम आमाल रद्द कर दिए जाएँगे। सबसे बुरा आदमी नमाज़ का चोर है।

(मुकाशफ़ातुल कुलूब शरीफ स. 153)


हज़रत अबु बक़र सिद्दीक़ रदिअल्लाहो तआला अन्हु नमाज़ के वक्त फरमाते हैं ऐ लोगों अल्लाह ने तुम्हारे लिए जो आग लगाई है उठो और उसे नमाज़ के लिए बुझा दो। हज़रत अनस ने फ़रमाया शबे मैराज में सरकारे मदीना सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम के उम्मतियों पर पचास वक्त की नमाज़ें फ़र्ज की गईं, फ़िर कम की गईं। यहाँ तक की पाँच रह गईं। आवाज़ दी गई ऐ मेरे मेहबूब इन पाँच के अन्दर ही पचास का सवाब है


(बुख़ारी शरीफ़ जिल्दे अव्वल स.50)


मसअला- हर आकिल, बालिग़ पर नमाज़ फ़र्ज है। उसकी फ़रज़ीयत का मुनकिर काफ़िर है और जान-बूझकर छोड़ दे अगर चे एक वक्त की हो वह फ़ासिक़ है। जो नमाज़ न पढ़ता हो उसे क़ैद में रखा जाए जब वह तौबा करके नमाज़ पढ़ने लगे तब रिहा किया जाए। इमाम मालिक, इमाम शाफई, इमाम अहमद के नजदीक सुल्तान ए इस्लाम उसके क़त्ल का हुक्म दें


#अहम_बात


फेसबूक पर दीन की बड़ी बड़ी बात करने से पहले अपने दीन को मुकम्मल कर ले 5 वक़्त की नमाज को मुकम्मल कर ले सिर्फ नाम के मुसलमान न बने।


या अल्लाह हम तमाम उम्मत ए मुस्लिमा को पाँच की नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमा।


आमीन

सुम्मा आमीन



कुरान_की_ये_बातें_हुई_सच_विज्ञान_भी_कर_चुका_है_साबित


हम सब जानते हैं कि कुरआन अल्लाह का कलाम है इस मे कोई शक की गुंजाइश नहीं है लेकिन मौजूदा दौर मे लोगो को साईंस पर भरोसा है तो आईए जानते हैं कुरआन मे अल्लाह क्या फरमाता है। 


1⃣ हम सभी जानते हैं कि पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्व है कुरआन इसी विचार में एक असाधारण दावा करता है कुरआन कहती है कि जिंदगी पानी में पैदा हुई है पानी को ही पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए मूल तत्व माना गया है


2⃣ लोहा प्राकृतिक रूप से धरती पर पाई जाने वाली धातु नहीं है यह धरती पर अंतरिक्ष से आया है, जिसे विज्ञान भी साबित कर चुका है अद्भुत बात यह है कि लोहे की उत्पत्ति कुरआन में लिखा है, हमने लोहे को नीचे धरती पर भेजा है समस्त मानव जाति के फायदे के लिए


3⃣आसमान हमारी हिफाजत करता है पृथ्वी को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में आसमान एक बहुत ही महत्वपूर्ण रोल अदा करता है, कुरआन आसमान को समझाने के लिए हमसे कहता है कि हमने आसमान को तुम्हारे लिए हिफ़ाजती छत बनाया है


4⃣ कुरआन हमारा ध्यान पहाड़ के बारें में एक बहुत ही खास पहलू की ओर खींचती है क्या हमने दुनिया को आराम करने वाली जगह नहीं बनाया और पहाड़ों को धरती का कोटा नहीं बनाया। कुरआन हमें बताती है कि पहाडों की जड़े धरती में बहुत गहरी है


5⃣ ब्रह्मांड का विस्तार। जब खगोलीय विज्ञान अपनी शुरुआती दौर में थे कुरान में ब्रह्मांड के फैलने का बयान किया गया। कुरान में कहा गया है कि ब्रह्मांड को हमने ही अपनी सृजनात्मक शक्तियों से बनाया है। और इसको हम बढ़ाते रहेंगे।


6⃣ सूर्य स्थिर नहीं है बल्कि वो हमारे मिल्की वे गैलेक्सी में मध्य में घूमता रहता है कुरआन में लिखा गया है की वो जिसने रात दिन चांद सूरज बनाया वह अल्लाह ही है। और यह चांद सितारे सब अपने ही कक्ष में तैरते रहते हैं जिसको विज्ञान भी साबित कर चुका है


7⃣ दर्द को महसूस करने वाले टिशूज काफी लंबे समय तक नहीं समझा जाता रहा कि महसूस करना और दर्द का अंदाजा करने वाले टिशूज दिमाग में ही होते हैं। इस पर कुरआन में लिखा गया है जिन लोगों ने हमारे खुलासों को झूठ समझा है हम उन्हें आग में झुलसायेगे और जब उनकी खाल जल जाएगी तो उन्हें नई खाल देंगे ताकि वह दर्द को निरंतर महसूस करते रहेगे।


#अहम_बाते


आपको हैरानी होगी सुन कर के कि, कुरआन की 80 फीसदी बात सच साबित हो चुकी है और 20 फीसदी बात पर साईंस ने नहीं गलत कहा है नहीं सही। इंशा अल्लाह बहुत जल्द साईंस जैसे जैसे और विकास करेगा वो भी सच साबित हो जाएगा।


आखिर मे दुआ है कि अल्लाह तमाम उम्मत ए मुस्लिमा को कुरआन को पढ़कर ,समझकर और अमल करने की तौफीक अता फरमाएं 🤲


आमीन

सुम्मा आमीन


सुल्तान_सलाहुद्दीन_अय्युबी_की_दास्तान


आपलोग से गुजारिश है कि पूरा पढ़ना🙏


इस्लाम में बहुत कम ऐसे हुक्मरान गुजरे हैं जिनको मुसलमानों के साथ_साथ गैर मुस्लिम भी इज्जत की निगाहों से देखते हैं ऐसे ही हुक्मरानों में सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी रहमतुल्लाह अलैहि एक ऐसा नाम है जो इनकी बहादुरी रंगीली और दानिश मंदी की मिसाल दुश्मनाने इस्लाम भी दिया करते है अक्सर मुसलमानों सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी रहमतुल्लाह अलैहि का नाम तो जरूर सुना होगा मगर अफसोस बहुत कम मुसलमान ऐसे हैं जो इस्लाम के इस मुजाहिद के इतिहास के बारे में जानते होंगे क्योंकि आज का मुसलमान इस्लाम की हीरो से ज्यादा हॉलीवुड बॉलीवुड के हीरो के बारे में जानने की दिलचस्पी रखता है 😭


इनका पूरा नाम सुल्तान सलाहुद्दीन युसूफ था यह 1138 ईस्वी में मौजूदा इराक की #तकरीर शहर में पैदा हुए थे इनके सल्तनत को अयूबी सल्तनत कहा जाता है इनकी मौजूदगी में मुसलमानों ने मिस्त्र, (शाम) यानी सीरिया, यमन, ईराक वगैरह मुल्कों को फतह किया इस्लाम में सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी का इतना ऊंचा माकाम इसलिए है क्योंकि यह वही बहादुर मूसा ही थे जिन्होंने जालिम ईसाइयों से मुसलमानों के बैतुल मुक़द्दस  को फतह किया था इसीलिए इन्हें बैतूल मुकद्दस का विजेता भी कहा जाता है ।


सुल्तान सलाहुद्दीन के बारे में जानने के लिए पहले हमें तारीख में थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा।


634 ईस्वी - 645 ईसवी में हजरत उमर रजि अल्लाहु ताला अन्हु की खिलाफत में मुसलमानों ने सीरिया और मिश्र को फतह कर लिया था इसमें सबसे बड़ी फतेह थी बैतूल मुकद्दस की फतेह फिर संधू की सल्तनत जब कमजोर पड़ी तो मुसलमानों की छोटी_छोटी हुकुमत तो मिट गए जिसका फायदा उठाकर ईसाइयों ने बैतूल मुक़द्दस मुसलमानों की हात से छीन लिया, मुसलमानों के हारने की बड़ी वजह यह थी कि वह फिरको में पड़ चुके थे जैसा कि आज भी मुसलमान फिरका मे पड़े हुए है 

सन 1099 ईस्वी में ईसाइयों ने फलस्तीन के साथ बैतूल मध्य इस पर भी कब्जा कर लिया और मुसलमानों के साथ जुल्म की हदें पार कर डाली यह जालिम इसाई फौजियों ने मुसलमान औरतों और बच्चों समेत 70 हजार मुसलमानों को शहीद किया पूरा फलस्तीन मुसलमानों के खून से लाल हो चुका था जब फलस्तीन पर ईसाइयों का कब्जा हो गया तो पूरी इस्लामी दुनिया में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि फलस्तीन इस्लामी दुनिया का दिल है बैतूल मुकद्दस मुसलमानों का अव्वल कीबला है फिर अलग_अलग वक्त पर कई मुस्लिम हुक्मरानों ने बैतूल मुकद्दस को आजाद कराने की कई कोशिशें की मगर वह कामयाब ना हो सके नूरुद्दीन जंगी वह हुक्मरान थे जिन्होंने बैतूल मुकद्दस को फतेह करने का जिम्मेदारी उठाया उनकी ख्वाहिश थी कि  बैतूल मुकद्दस फतेह के बाद मस्जिदे अक्सा में अपने हाथ से यह मिम्बर लगाऊं मगर अल्लाह को यह मंजूर नहीं था पता है बैतुल मुक़द्दस की फतेह से पहले ही उनका देहांत हो गया था सुल्तान सलाहुद्दीन नूरुद्दीन जंगी की फौज में एक फौजी थे। मिस्र को जिस फौज ने फतह किया था उसमें सलाउद्दीन अयूबी मौजूद थे और इस फ़ौज की कमान को इनके ही हाथ में थी । सलाहुद्दीन अयूबी के चाचा थी मिश्र फतेह होने के बाद 1164 ईस्वी में सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी को उनकी बहादुरी और तेज तहनियत को देखते हुए मिस्र का गवर्नर बना दिया गया। इन्होंने अपनी बहादुरी और जंगी चलाकी से अपनी अकल के बलबूते पर उसी वक्त यमन को भी फतेह कर लिया था नूरुद्दीन जंगी का इंतकाल हुआ तो उनका कोई लायक उत्तराधिकारी ना था इसलिए उन्होंने अपनी पूरी सल्तनत पर सलाहुद्दीन अयूबी के नाम कर दिया और इस वक्त सलाहुद्दीन की उम्र महज 21 साल ही थी इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सलाहुद्दीन अय्युबी किस कदर बहादुर और बेहतरीन हुक्मरानी के मालिक थे सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी ने बैतूल मुकद्दस को फतेह करने को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था इनके दिलो दिमाग में इस्लाम का जज्बा भरा पड़ा था इस्लाम के लिए कुछ कर गुजरने का इन्होंने ठान लिया था और फिर अल्लाह  ने मिस्र के हुक्मरान के तौर पर इनको पावर भी दे दी सलाहुद्दीन अय्युबी जब मिश्र पहुंचे तो उन्होंने देखा कि ईसाइयों ने मिस्र को बर्बाद करके रख दिया है यहां के लोग शराब में धुत रहते जानकारी बिल्कुल आम हो चुकी थी मिस्र की हुकूमत में कुछ मुसलमान ऐसे भी थे जो ईसाइयों के एजेंट थे  सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी को इन दोनों मुसीबतों से लड़ना था पहला तो शराब और जनाकारी को मुल्क से खत्म करना जो कि इतना आसान नहीं था और दूसरा और गद्दार मुसलमानों मुनाफिक को ढूंढ निकालना जो ईसाइयों की एजेंट बन बैठे थे और उधर बैतुल मुक़द्दस की फतेह करने के लिए सलीबीयो से उन्हे जंग जारी रखनी थी तो तब सलाउद्दीन अय्युबी मिस्र में दाखिल हुए तो वहां का जो सबसे बड़ा फौजी कमांडर था जिसका नाम नाती था वह सलाउद्दीन अय्युबी को देखकर मुस्कुराता है क्योंकि यह पक्का ईसाइयों का एजेंट था और उन्हीं के लिए मिस्र में काम कर रहा था तो उसने सब देखा कि 22 साल का नौजवान दीन ए इस्लाम की बातें कर रहा है बैतूल मुक़द्दस फतह करने की बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है 


जब कमांडर नाती अपने सभी शैतानी साथियों के साथ महफिल में बैठा तो उसके साथियों ने कहा कि अब तो तुम्हारी इरादे कामयाब ना होंगे क्योंकि अब एक सच्चा मुसलमान हुक्मरान तुम पर हाकिम हो गया है तो उस कमांडर नाती ने हंसकर कहा कि अरे यह तो बच्चा है हम इस बच्चे को पाल लेंगे मैं देख लूंगा। एक शख्स बोला सलाहुद्दीन अय्युबी  को लेकर बहुत जल्द पता चल गया कि यह बच्चा नहीं यह नाको चने चबाने वाला जूता है। दोस्तो उस दौर में ईसाई, मुसलमानों से जंग तलवारों की ताकत पर ना जीत पाते तो मुसलमानों की फौज में अपने एजेंट भेज देते और दो चीजों से मुस्लिम हुक्मरानों को अपने वश में करने की साजिश करके या दूसरी खूबसूरत लड़कियां इसाई हुक्मरान अपनी ही बेटियों को मुस्लिम हुक्मरानों के खेमे में यह कह कर भेज देते कि जाओ तुम उसके साथ कैसे भी करके जीना करो उसको अपनी तरफ लुभाओ युरुस्लम (ईसाई भगवान)  तुम्हें सीधे जन्नत देगा और इन ईसाइयों के इस शैतानी साजिश का शिकार हो जाते  जब बैतूल मुक़द्दस के इसाई हुक्मरानों को पता चला कि सुल्तान सलाहुद्दीन नाम का तुर्क लड़का बैतूल मुक़द्दस फतह करने आया है तो उन ईसाइयों ने सलाहुद्दीन अयूबी के साथ भी यही चाल चली कमांडर नाती जो मुसलमानों के भेष में ईसाइयों का एजेंट था उसने कई मर्तबा सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी को अलग अलग महफिलों में बहाने से शराब पिलाने की कोशिश की मगर सलाहुद्दीन अयूबी पक्के मुस्लिम थे वह कहते कि यह मुस्लिम देश है जहां शराब पीना हराम है और मैं तो बिल्कुल भी शराब नहीं पियूंगा नाती जी को लगा कि सलाहुद्दीन तो शराब को हाथ भी नहीं लगाता है तो उसने लड़की वाला फार्मूला अपनाया एक रात को ना जीने एक खूबसूरत लड़की को इस काम के लिए तैयार कर लिया फिर सुल्तान सलाहुद्दीन के पास आकर बोला कि सुल्तान एक लड़की परेशान है बहुत दूर से आई है आप से बड़ी उम्मीदें लगाई हुई है वह आपसे मिलना चाहती है सुल्तान सलाहुद्दीन ने कहा कि ठीक है बुला लो नाती ने कहा नहीं नहीं सुल्तान वह आपसे अकेले में ही अपनी परेशानी बताने की जिद कर रही है तब सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी मुस्कुराए क्योंकि उनको अंदाजा हो गया था कि यह बदबख्त मुझे एक इस साजिश में फंसाना चाहता है मगर सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी ने कहा कि ठीक है मैं मेरे खेमे में जा रहा हूँ लड़की को भेज देना फिर उस लड़की को भेजा गया हालांकि पूरी प्लानिंग यह थी कि उस लड़की को कहा गया था कि तुम जाओ और किसी न किसी तरह सुल्तान के साथ गलत हरकतें करो और सुल्तान को अपनी तरफ माइल करो और अगर तुम सुल्तान को एक गिलास भी शराब पिला दो तो जो तुम मांगोगे वह तुम्हें दिया जाएगा मगर जब लड़की अंदर गई तो सलाहुद्दीन अयूबी ने उसे देखते ही अपने कंधे से चादर उतारी और उस लड़की को दे दी और कहा कि इससे अपना बदन ढक लो इस अमल से वह लड़की अपने आप पर शर्मिंदा हो गई सलाउद्दीन अय्युबी ने उससे पूछा कि तुम्हारे मां बाप कौन है तो वह लड़की इस सवाल का जवाब ना दे सकी क्योंकि इस स्लेबियन ईसाई ऐसी लड़कियों को बचपन में ही कहीं से अगवा कर लिया करते थे और इस तरह के कामों के लिए उनकी खास परवरिश किया करते थे फिर वह लड़की रोते हुए बोली के इन लोगों ने मुझे आपके साथ गलत हरकतें करने के लिए भेजा था सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी मुस्कुराए और कहा कि जाओ उनसे कह दो कि जो काम तुमने कहा था वह मैंने कर दिया जब वह लड़की अपने सरदारों के पास गई तो अगले ही दिन नाती उठा और शोर मचाने लगा कि देखो हमारा सुल्तान तो शराबी है वह तो लड़कियों के साथ जिनाकारी करता है जब सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी अपने खेमे से बाहर आए तो लोगों में उनकी बातें चल रही थी सुल्तान ने कहा कि ज़रा उस लड़की को तो पूछ लो कि रात को क्या हुआ था जब लड़की को बुलाया गया तो उस लड़की ने सबके सामने कहा कि जिस खुदा को मैं मानती हूं उसकी कसम मेरे सलाहुद्दीन जैसा बहादुर और शरीफ इंसान आज तक नहीं देखा मैं रात भर उनके साथ रही मगर सुल्तान ने एक गलत निघा भी मुझ पर न डाली फिर उस सलेबियन एजेंट नाती का काला मुंह हुआ और अपने गलत इरादों को अंजाम ना दे सका

भाइयो यह किरदार था सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी का और एक किरदार आज हमारा है जो व्हाट्सएप और फेसबुक सिर्फ इसलिए चलाते हैं ताकि लड़कियों को चैट की जाए 😭

जब ईसाइयों की शराब और लड़की वाली साजिश काम ना आए तो इन्होंने सुल्तान को कत्ल करने की तीसरी साजिश रचने शुरू कर दी इन लोगों ने हसन मीम (Assassin) से मदद मांगी जो दुनिया का बदतरीन इंसान था कहता तो था अपने आपको मुसलमान था मगर असल में मुस्लिम वाली कोई बात ही नहीं थी उसमें अपने लोगों की एक ऐसी फौज बना रखी थी जो बड़े बड़े लोगों को किसी भी हालत में मारने की ताकत रखती थी और आज हम इस फौज को Assassins के नाम से जानते हैं अलग अलग वक्त पर तीन बार ऐसी Assassins ने सुल्तान सलाहुद्दीन पर हमला किया मगर वह हर बार इन लोगों को मार गिराते। यहां तक कि Assassins सुल्तान सलाहुद्दीन  की फौज में उनके बॉडीगार्ड के रूप में भी शामिल हो गए थे और एक दोपहर जब सुल्तान सलाहुद्दीन अय्युबी अपने खेमे में सो रहे थे तब इन Assassins ने मौका पाकर सुल्तान पर हमला कर दिया मगर सुल्तानी नींद में भी जंग की हालत में होते थे हमला निशाने पर नहीं लगा तो सुल्तान की आंख खुल गई और एक पल में ही सुल्तान ने जान लिया कि यह थी डायन ऐसी चीज है तो सुल्तान ने उसी वक्त अपने मुह से उस ज़ालिम के सिर पर ऐसी चोट मारी कि उस ज़ालिम की हड्डी टूटने की आवाज आई और वह वहीं गिर पड़ा । इतना परेशान हो चुके थे कि ऐसे सुल्तान से कैसे निपटा जाए जब सुल्तान सलाहुद्दीन ने मिस्र में अपनी हुकूमत मजबूत कर ली तो उन्होंने बेहतर मस्जिद की तरफ चढ़ाई करने का इरादा किया इनमें जिहाद का जोश कूट कूट कर भरा हुआ था उनकी जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद था वह था बैतूल मुक़द्दस की फतेह हितेन के मैदान में मुसलमानों की ईसाइयों से भीषण जंग हुई सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी की फौज ईसाइयों का सफाया करते हुए बैतूल मुकद्दस की ओर बढ़ रही थी ईसाइयों के फौजी मारे जा रहे थे यहां तक कि खुद सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी दुश्मनों के बीच जाकर दुश्मनों के सर कलम कर रहे थे हजारों ईसाइयों को संग में कत्ल कर दिया गया और कई हजारों को गिरफ्तार कर लिया गया सुल्तान सलाउद्दीन ने आगे बढ़कर 2 अक्टूबर 1187 ईस्वी को बैतूल मुक़द्दस फतह कर इस्लाम का झंडा गाड़ दिया और पूरे फलस्तीन से मसीही हुकूमत का खात्मा हो गया  यह साबित कर दिया कि वह इस वक्त की दुनिया में सबसे ताकतवर हुक्मरान है। सुल्तान सलाहुद्दीन अयूबी एक बहादुर बुद्धिमान और एनी दर सिपहसालार तो थे ही इसके साथ ही वे बहुत बड़े दरिया दिल इंसान भी थे, सुल्तान सलाहुद्दीन का कॉल है जिस कौम के नौजवान बेदार हो जाये 


उस कौम को कोई शिकस्त नहीं दे सकता हम लोगो को बेदार होने की सख्त जरूरत है


अगर हम उम्मत बन जाएँ 


तो, टीपू सुल्तान भी हम,

सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी भी हम,नूरुद्दीन जंगी भी हम,एर्ताग्रूल गाज़ी भी हम,और महमूद गजनवी भी हम ही होंगे।


इस उम्मत की तबाही व बर्बादी "वहन" की वजह से है

 इस उम्मत की तबाही व बर्बादी "वहन" की वजह से है


वहन क्या है ?? रसूल ﷺ ने फरमाया


"दुनिया से मुहब्बत और मौत का ख़ौफ़"


नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : 


करीब है कि दूसरी कौमें तुम पर ऐसे टूट पड़ेगी जैसे भूखा खाने पर टूट पड़ता है."


किसी ने अर्ज किया

 क्या हम उस वक्त बहुत तादाद मे कम होंगे ?? 


रसूलुल्लाह ने फरमाया: 

"नहीं बल्कि तुम उस वक्त बहुत ज्यादा होंगे लेकिन तुम समुन्दर के ऊपर तैरते हुए कूड़े कचरे की तरह होंगे

अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों के सीने से तुम्हारा खौफ निकाल देगा और तुम्हारे दिलों में वहन डाल देगा.


किसी ने कहा :

 "या रसूलुल्लाह वहन क्या चीज है?"


तो फरमाया:

दुनिया से मुहब्बत और मौत का डर

Reference : अबु दाऊद शरीफ हदीस नंबर . 4297 📙


मौत एक ऐसी चीज़ है जिसका ख़ौफ़ बन्दा-ए-मोमिन के दिल में नही होता, क्यूँकि वह जानता है, बल्कि ईमान रखता है कि मौत ज़िन्दगी का ख़ात्मा नही है बल्कि यह तो अल्लाह से मुलाक़ात का एक ज़रिया है


मोमिन मौत से नही डरता वो क्या मौत से डरेगा जिसके लिये जन्नत कि बहारे इन्तिज़ार कर रही हो 

वो क्या डरेगा मौत से जिसके रुह निकलने से पहले ही उसको इनामात मिल रही हो


تَتَنَزَّلُ عَلَیۡہِمُ الۡمَلٰٓئِکَۃُ اَلَّا تَخَافُوۡا وَ لَا تَحۡزَنُوۡا وَ اَبۡشِرُوۡا بِالۡجَنَّۃِ الَّتِیۡ کُنۡتُمۡ تُوۡعَدُوۡنَ


उन पर फरिश्ते नाज़िल होते है और कहते है गम न करो खुश हो जाओ उस जन्नत के लिए जिसका वादा तुम्हे दिया गया है 


सुरह हाममिम, आयात 30 📖 قرآن 

 


या अल्लाह हम तमाम मुसलमानों के दिलो से मौत का खौफ निकाल दे और अल्लाह और रसूल की सच्ची मुहब्बत डाल दे और दुनिया की मुहब्बत निकाल दे और सच्चा और पक्का मुसलमान बना दे


आमीन 🤲

सुम्मा आमीन



क़ुर्बानी_का_असल_मकसद_क्या_है

#क़ुर्बानी_का_असल_मकसद_क्या_है ? आप तमाम लोग से गुजारिश हैं कि इस पोस्ट को जरूर पढ़िए 🙏 क़ुर्बानी का लफ़्ज़ “क़ुर्ब” से बना है जिसका मतलब होता है ‘क़रीब होना’ महबूब जानवर को ज़िबह करने का मकसद अल्लाह से अपनी नजदीकियों को बढ़ाना मकसूद है इसलाम में बुनयादी तौर पर क़ुर्बानी हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के ज़माने से है जब उन्होंने अपने बेटे को क़ुर्बान करने की कोशिश की तो अल्लाह ने उनके बेटे के बदले एक जानवर की क़ुर्बानी ली तब से यह अपनी जान की क़ुर्बानी के निशान व सुन्नत के तौर पर हर साल दी जाती है क़ुरआन में उन बाप बेटों की बातचीत हजरत इब्राहीम ने कहा ऐ मेरे बेटे मैं ख़्वाब में तुम्हे क़ुर्बान करते हुए देखता हूँ तो तुम बताओ कि इस बारे में तुम्हारी क्या राय है ? बेटे इस्माइल ने जवाब दिया : अब्बू जान आप को जो हुक्म दिया जा रहा है उसे ज़रूर पूरा कीजिए, अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वालों में पाएँगे। सूरह साफ्फात: 102 📙 सच है कि यह जवाब इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के बेटे का ही हो सकता था। इसमें हज़रत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) का कमाल ये ही नहीं कि क़ुर्बान होने के लिए तैयार हो गए बल्कि कमाल यह भी है कि अपनी अच्छाई को अल्लाह की तरफ मंसूब किया कि ”अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे सब्र करने वालों में पाएँगे 😊 हदीस में बयान हुई है अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यह क़ुर्बानियां क्या हैं? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया कि तुम्हारे बाप इब्राहीम का तरीक़ा (सुन्नत) Reference मुसनद अहमद: 18797, इब्ने माजा: 3127 📖 क़ुरबानी में अपने जानवर की जान को अल्लाह के नाम ज़िबह करके बंदा इस जज़्बे का इज़हार कर रहा होता है कि मेरी जान भी अल्लाह की दी हुई है और जिस तरह आज मैं अपने जानवर की जान अल्लाह के लिए दे रहा हूँ अगर अल्लाह का हुक्म हुआ तो अपनी जान भी मैं देने के लिए तैयार हूँ। यही वह जज़्बा है जो क़ुरबानी की असल रूह है अगर हमारे अन्दर अपने जानवर की क़ुरबानी के साथ यह जज़्बा नहीं है तो यह असल क़ुरबानी नहीं है फ़िर यह ऐसे ही है जैसे रोज़ लोग अपने खाने के लिए जानवर ज़िबह करते हैं यही जज़्बा क़ुर्बानी का मक़सद है और यही जज़्बा अल्लाह को कबूल है अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी क़ुरबानी ‘यानि’ मेरा जीना मेरा मरना अल्लाह के लिए है जो सब जहांनो का रब है। (कुरआन 6:162) क़ुर्बानी में कई हिकमते हैं लेकिन इस का सबसे अहम फलसफा यह है कि अल्लाह बन्दे के लिए सबसे बढ़ कर है। इस बात को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि इस्लाम में क़ुर्बानी एक इबादत की हेसियत रखती है और जैसा की आप जानते हैं कि इबादतें जितनी भी हैं वो सब बन्दे का अल्लाह से ताल्लुक़ का इज़हार होती हैं अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है अल्लाह के पास ना तुम्हारी कुर्बानियों का गोश्त पहुँचता है और ना उनका खून, अल्लाह को सिर्फ़ तुम्हारा तक़वा पहुँचता है। (सूरह हज: 37) 📙 अल्लाह ने हजरत. इब्राहिम अ.स. से मुहब्बत की कुरबानी मांगी थी. और हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम ने भी अल्लाह की बारगाह मे जो पेश की, वो मुहब्बत की ही कुरबानी थी क्या हमारी कुरबानी वही कुरबानी है, जो अल्लाह ने हमसे मांगी थी या सिर्फ़ हमारी कुरबानी सिर्फ़ दिखावे की बन कर रह गई है, कुरबानी यह नहीं की महंगे से महंगा जानवर या बड़े से बड़ा जानवर कुरबान किया जाए कुरबानी का असल मकसद मुहब्बत की कुरबानी का है, जब जानवर पे छुरी चलायें तो दिल मे ये नीयत रखें और अल्लाह से वादा करें की ऐ अल्लाह हम तेरी राह मे अपने माल की कुरबानी दे रहे हैं, ऐ अल्लाह हमने अपनी जिंदगी मे बहुत झूठ बोला है, बहुत से लोगों को धोखा दिया है ऐ अल्लाह हमें माफ कर आज हम उस झूठ और उस धोखे की कुरबानी दे रहे हैं ऐ अल्लाह हमने कम तौला है ,कम बेचा है, हम उस कम तौलने और कम बेचने की कुरबानी दे रहे है ऐ अल्लाह हमारे दिलों मे जो अपने भाईयों से कीना है, हसद है, जलन है, उस कीना को उस हसद को, उस जलन को अल्लाह आज हम कुरबान कर रहे हैं ऐ अल्लाह आज हम अपने माल की हिर्स ओ हवस को कुरबान कर रहे हैं ऐ अल्लाह आज हम अपनी बदनीयती, बेहयाई को कुरबान कर रहे हैं.. ऐ अल्लाह आज हम दुनिया की हर मुहब्बत को तेरी राह मे कुरबान कर रहे हैं ऐ अल्लाह हमारी कुरबानी को कबूल फरमा अगर इसी सोच के साथ हमने अपनी कुरबानी अपने अल्लाह के सामने पेश की तो यही वो कुरबानी है जो हमारा अल्लाह हमसे चाहता है और अगर यह सोच हमारी नहीं तो फिर वो कुरबानी, कुरबानी नहीं एक दिखावा होगी लोगों यकीन रखो अपना हर अमल अल्लाह को राज़ी के लिये करे दिखावा अल्लाह को पसंद नहीं है अल्लाह हमें कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाएं।। आमीन सुम्मा आमीन 🤲

कर्मचारी बनते ही निम्न पर फोकस करे, चाहे भारत में है या खाड़ी अथवा यूरोप में

कर्मचारी बनते ही निम्न पर फोकस करे, चाहे भारत में है या खाड़ी अथवा यूरोप में 1. पहले घर बनाएं. चाहे वह गाम में हो या शहर में । 50 की उम्र में घर बनाना कोई उपलब्धि नहीं है. किराया या सरकारी क्वार्टर के मकानों की आदत न डालें. ये आराम बहुत खतरनाक है 2. छुट्टी लेते रहो. सऊदी में मैने देखा बहुत से लोग, एक तो हमारे लेवल के सुपरवाइजर थे डेढ़ लाख कमाते थे मगर 4 साल बाद घर जाते थे जबकि हम सब 11 महीने होते ही उछल पड़ते थे। कंपनी वैसे तो 2 साल मे भेजती थी 21 दिन सैलरी ज्यादा देकर लेकिन हम अपातकाल लीव लगाकर अपने खर्चे पर जाते थे। आप अपने विभाग के नवाब नहीं हैं. यदि आप आज टपक गए तो आपको तुरंत बदल दिया जाएगा और काम जारी रहेगा। 3. प्रमोशन के पीछे न भागें. अपने कौशल में महारत हासिल करें और जो भी करें उसमें उत्कृष्ट बनें। अगर कंपनी आपको बढ़ावा देना चाहती हैं, तो खुद प्रमोट कर देगी नही तो कोई बात नहीं,सकारात्मक रहें। 4 काम के समय गपशप ना करे। उन चीजों से बचें जो आपके नाम या प्रतिष्ठा को धूमिल करती हों। उस गिरोह में शामिल न हों जो आपके मालिकों और सहकर्मियों की चुगली करता है। 5. आपके पास एक अतिरिक्त व्यवसाय हो जाए इसकी सोच में लगे रहे।आपका वेतन लंबे समय तक आपकी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। 6. कुछ पैसे बचाएं. इसे आप पहले ही से काट कर निवेश में लगा दो 7. उधार की टोपी न पहने. अगर कोई प्रोजेक्ट दिख रहा है और आपको अनुभव है, पार्ट टाइम है, इसके लिए उधार ले ले लेकिन फोन या गाड़ी के लिए उधार न ले। 8. अपने जीवन, विवाह और परिवार को निजी रखें। उन्हें अपने काम से दूर रहने दें. यह बहुत महत्वपूर्ण है। 9. अपने प्रति वफादार रहें और अपने काम पर विश्वास रखें। काम से काम रखे। अपने बॉस के आसपास घूमने से आप अपने सहकर्मियों से दूर हो जाएंगे और आपका बॉस आपको छोड़कर चला जाएगा। 10. कार्य कल्याण से जुड़ें और सदैव सक्रिय सदस्य रहें। किसी भी घटना के घटित होने पर यह आपकी बहुत मदद करेगा। 11. छुट्टी के दिनों का उपयोग अपने भविष्य के प्लानिंग को विकसित करने में करें.. आमतौर पर आप साल की छुट्टियों के दिनों में जो करते हैं वह इस बात का प्रतिबिंब होता है कि आप नौकरी के बाद कैसे रहेंगे.. अगर इसका मतलब यह है कि आप अपना सारा समय reels देखने में बिता देते हैं तो सेवानिवृत्ति के बाद कुछ भी अलग होने की उम्मीद न करें। 12. सेवा या काम करते हुए ही कोई प्रोजेक्ट शुरू करें। कोई स्किल सीखे, काम के दौरान अपने प्रोजेक्ट को चलने दें, जैसा निरमा वाशिंग पाउडर का मालिक करता था, इसे आज की नस्ल साइड हसल कहती है। अगर यह अच्छा काम नहीं करता है, तो दूसरा प्रोजेक्ट तब तक शुरू करें जब तक यह व्यवहार्य रूप से चलने लगे। 13. पेंशन का पैसा कोई प्रोजेक्ट शुरू करने या दुकान लगाने या घर बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह आपके रखरखाव या खुद को अच्छे स्वास्थ्य में बनाए रखने के लिए है। पेंशन का पैसा स्कूल की फीस भरने या जवान पत्नी से शादी करने के लिए नहीं है, बल्कि अपना ख्याल रखने के लिए है। 14. सरकारी आवास या कंपनी के घर की बजाय अपने घर पर सेवानिवृत्त हों ताकि जब आप सेवानिवृत्त हों तो आप उस समाज में आसानी से फिट हो सकें जिसने आपको बड़ा किया है। कंपनी के घर या सरकारी घर पर अधिक वर्ष बिताने के बाद किसी स्थान पर रहने के लिए समायोजित करना आसान नहीं है। 15. निवेश करे, पहली सैलरी मिलते ही उसका 10 टका निकल कर म्यूचुअल फंड में गेर दीजिए। हर महीने ऐसा करे। 30 साल के अंतराल में यह 10% 10% बढ़कर बहुत ज्यादा ही जायेगा। 16. रिटायर होने से नफरत न करें क्योंकि एक दिन आप स्वेच्छा से या अनैच्छिक रूप से रिटायर हो जायेंगे। आशा है कि इससे आपको जीवन को सकारात्मक रूप से देखने में मदद मिलेगी। इस पोस्ट के प्रायोजक थे Fit Monk , a store of healthy foods. यदि आपको पोस्ट पसंद आती है तो इसे शेयर करे। Fit Monk आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

Sunday, 24 December 2023

भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् 1860 में लागू हुई और जाने सारी धाराएँ


भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् 1860 में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर संशोधन होते रहे (विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद)। पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन अन्य ब्रिटिश उपनिवेशों (बर्मा, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई आदि) में भी लागू की गयी थी। लेकिन इसमें अब तक बहुत से संशोधन किये जा चुके है। भारतीय न्याय संहिता 2023 ने इसे विस्थापित कर दिया।

अध्याय 2
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उद्देशिका
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धारा 1 संहिता का नाम और उसके प्रर्वतन का विस्तार
यह अधिनियम भारतीय दण्ड संहिता (IPC) कहलायेगा, और इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर होगा।

अनुच्छेद 370 के हटाए जाने पर भारतीय दण्ड संहिता संपूर्ण भारत पर लागू होगा जिसमे केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भी शामिल है |[1] संविधान के अनुसूची 5 के तहत 109 कानून अब जम्मू और कश्मीर पर भी लागू होंगे जिसमें भारतीय दण्ड संहिता के साथ-साथ हिन्दू विवाह अधिनियम भी सम्मिलित हैं।
धारा 2 भारत के भीतर किए गये अपराधों का दण्ड
हर व्यक्ति इस संहिता के उपबन्धों के प्रतिकूल हर कार्य या लोप के लिए जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दण्डनीय होगा अन्यथा नहीं ।

धारा 3 भारत से परे किए गये किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अपराधों का दण्ड
भारत से परे किए गए अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति किसी भारतीय विधि के अनुसार विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए उससे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसा बरता जाएगा, मानो वह कार्य भारत के भीतर किया गया था ।

धारा 4 राज्य-क्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार
इस संहिता के उपबन्ध -

(1) भारत के बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा ;

(2) भारत में पञ्जीकृत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा, किए गए किसी अपराध को भी लागू है

स्पष्टीकरण - इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किया गया ऐसा हर कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता तो, इस संहिता के अधीन दण्डनीय होता ।

दृष्टान्त
क. जो भारत का नागरिक है उगाण्डा में हत्या करता है । वह भारत के किसी स्थान में, जहाँ वह पाया जाए, हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्ध किया जा सकता है ।

धारा 5 कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना
इस अधिनियम में की कोई बात भारत सरकार की सेवा के ऑफिसरों, सैनिकों, नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और अभित्यजन को दण्डित करने वाले किसी अधिनियम के उपबन्धों, या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबन्धों, पर प्रभाव नहीं डालेगी ।

अध्याय 2
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साधारण स्पष्टीकरणI
धारा 6 संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना
इस संहिता में सर्वत्र, अपराध की हर परिभाषा, हर दण्ड उपबन्ध और हर ऐसी परिभाषा या दण्ड उपबन्ध का हर दृष्टान्त, “साधारण अपवाद” शीर्षक वाले अध्याय में अन्तर्विष्ट अपवादों के अध्यधीन समझा जाएगा, चाहे उन अपवादों को ऐसी परिभाषा, दण्ड उपबन्ध या दृष्टान्त में दुहराया न गया हो ।

दृष्टांत : (क) इस संहिता की वे धाराएँ, जिनमें अपराधों की परिभाषाएँ अन्तर्विष्ट हैं, यह अभिव्यक्त नहीं करती कि सात वर्ष से कम आयु का शिशु ऐसे अपराध नहीं कर सकता, किन्तु परिभाषाएँ उस साधारण अपवाद के अध्यधीन समझी जानी हैं जिसमें यह उपबन्धित है कि कोई बात, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है, अपराध नहीं है ।

(ख) 'क' , एक पुलिस ऑफिसर, वारण्ट के बिना, 'य' को, जिसने हत्या की है, पकड़ लेता है । यहाँ 'क' सदोष परिरोध के अपराध का दोषी नहीं है, क्योंकि वह 'य' को पकड़ने के लिए विधि द्वारा आबद्ध था, और इसलिए यह मामला उस साधारण अपवाद के अन्तर्गत आ जाता है, जिसमें यह उपबन्धित है कि “कोई बात अपराध नहीं है जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो ।

धारा 7 एक बार स्पष्टीकृत पद का भाव
हर पद, जिसका स्पष्टीकरण इस संहिता के किसी भाग में किया गया है, इस संहिता के हर भाग में उस स्पष्टीकरण के अनुरूप ही प्रयोग किया गया है ।

धारा 8 लिंग
पुलिंग वाचक शब्द जहाँ प्रयोग किए गए हैं, वे हर व्यक्ति के बारे में लागू हैं, चाहे नर हो या नारी ।

धारा 9 वचन
जब तक कि संदर्भ से तत्प्रतिकूल प्रतीत न हो, एकवचन द्योतक शब्दों के अन्तर्गत बहुवचन आता है, और बहुवचन द्योतक शब्दों के अन्तर्गत एकवचन आता है ।

धारा 10 पुरूष, स्त्री
“पुरुष” शब्द किसी भी आयु के मानव नर का द्योतक है ; “स्त्री” शब्द किसी भी आयु की मानव नारी का द्योतक है ।

धारा 11 व्यक्ति
कोई भी कम्पनी या संगम, या व्यक्ति निकाय चाहे वह निगमित हो या नहीं, “व्यक्ति” शब्द के अन्तर्गत आता है ।

धारा 12 लोक
लोक का कोई भी वर्ग या कोई भी समुदाय “लोक” शब्द के अन्तर्गत आता है ।

धारा 13 निरसित
“क्वीन” की परिभाषा विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा निरसित ।

धारा 14 सरकार का सेवक
"सरकार का सेवक" शब्द सरकार के प्राधिकार के द्वारा या अधीन, भारत के भीतर उस रूप में बने रहने दिए गए, नियुक्त किए गए, या नियोजित किए गए किसी भी ऑफिसर या सेवक के द्योतक हैं ।

धारा 15 निरसित
ब्रिटिश इण्डिया” की परिभाषा विधि अनुकूलन आदेश, 1937 द्वारा निरसित ।

धारा 16 निरसित
“गवर्नमेंट आफ इण्डिया” की परिभाषा भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा निरसित ।

धारा 17 सरकार
“सरकार” केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य की सरकार का द्योतक है ।

धारा 18 भारत
“भारत” से भारत का राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ।


धारा 19 न्यायाधीश
“न्यायाधीश” शब्द न केवल हर ऐसे व्यक्ति का द्योतक है, जो पद रूप से न्यायाधीश अभिहित हो, किन्तु उस हर व्यक्ति का भी द्योतक है,

जो किसी विधि कार्यवाही में, चाहे वह सिविल हो या दाण्डिक, अन्तिम निर्णय या ऐसा निर्णय, जो उसके विरुद्ध अपील न होने पर अन्तिम हो जाए या ऐसा निर्णय, जो किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्ट किए जाने पर अन्तिम हो जाए, देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो,

अथवा जो उस व्यक्ति निकाय में से एक हो, जो व्यक्ति निकाय ऐसा निर्णय देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो ।

दृष्टान्त (क) सन् 1859 के अधिनियम 10 के अधीन किसी वाद में अधिकारिता का प्रयोग करने वाला कलक्टर न्यायाधीश है ।

(ख) किसी आरोप के सम्बन्ध में, जिसके लिए उसे जुर्माना या कारावास का दण्ड देने की शक्ति प्राप्त है, चाहे उसकी अपील होती हो या न होती हो, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न्यायाधीश है ।

(ग) मद्रास संहिता के सन् 1816 के विनियम 7 के अधीन वादों का विचारण करने की और अवधारण करने की शक्ति रखने वाली पंचायत का सदस्य न्यायाधीश है ।

(घ) किसी आरोप के सम्बन्ध में, जिनके लिए उसे केवल अन्य न्यायालय को विचारणार्थ सुपुर्द करने की शक्ति प्राप्त है, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न्यायाधीश नहीं है ।

धारा 20 न्यायालय
“न्यायालय” शब्द उस न्यायाधीश का, जिसे अकेले ही को न्यायिकत: कार्य करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो, या उस न्यायाधीश-निकाय का, जिसे एक निकाय के रूप में न्यायिकत: कार्य करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो, जबकि ऐसा न्यायाधीश या न्यायाधीश-निकाय न्यायिकत: कार्य कर रहा हो, द्योतक है ।

दृष्टान्त :
मद्रास संहिता के सन् 1816 के विनियम 7 के अधीन कार्य करने वाली पंचायत[5], जिसे वादों का विचारण करने और अवधारण करने की शक्ति प्राप्त है, न्यायालय है ।

धारा 21 लोक सेवक
“लोक सेवक” शब्द उस व्यक्ति के द्योतक है जो एतस्मिन् पश्चात् निम्नगत वर्णनों में से किसी में आता है,

अर्थात् : 01 - पहले खण्ड का आलोप किया गया।

02 - भारत की सेना, नौ सेना या वायु सेना का हर आयुक्त ऑफिसर ;

03 - हर न्यायाधीश जिसके अन्तर्गत ऐसे कोई भी व्यक्ति आता है जो किन्हीं न्यायनिर्णयिक कॄत्यों का चाहे स्वयं या व्यक्तियों के किसी निकाय के सदस्य के रूप में निर्वहन करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो ;]

04 - न्यायालय का हर ऑफिसर (जिसके अन्तर्गत समापक, रिसीवर या कमिश्नर आता है) जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह विधि या तथ्य के किसी मामले में अन्वेषण या रिपोर्ट करे, या कोई दस्तावेज बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे, या रखे, या किसी सम्पत्ति का भार सम्भाले या उस सम्पत्ति का व्ययन करे, या किसी न्यायिक आदेशिका का निष्पादन करे, या कोई शपथ ग्रहण कराए या निर्वचन करे, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखे और हर व्यक्ति, जिसे ऐसे कर्तव्यों में से किन्हीं का पालन करने का प्राधिकार न्यायालय द्वारा विशेष रूप से दिया गया हो ;

05 - किसी न्यायालय या लोक सेवक की सहायता करने वाला हर जूरी-सदस्य, असेसर या पंचायत का सदस्य ;

06 - हर मध्यस्थ या अन्य व्यक्ति, जिसको किसी न्यायालय द्वारा, या किसी अन्य सक्षम लोक प्राधिकारी द्वारा, कोई मामला या विषय, विनिश्चित या रिपोर्ट के लिए निर्देशित किया गया हो ;

07 - हर व्यक्ति जो किसी ऐसे पद को धारण कर्ता हो, जिसके आधार से वह किसी व्यक्ति को परिरोध में करने या रखने के लिए सशक्त हो ;

08 - सरकार का हर ऑफिसर जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह अपराधों का निवारण करे, अपराधों की इत्तिला दे, अप्राधियों को न्याय के लिए उपस्थित करे, या लोक के स्वास्थ्य, क्षेम या सुविधा की संरक्षा करे ;

09 - हर ऑफिसर जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह सरकार की ओर से किसी सम्पत्ति को ग्रहण करे, प्राप्त करे, रखे, व्यय करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, निर्धारण या संविदा करे, या किसी राजस्व आदेशिका का निष्पादन करे, या 8[सरकार] के धन-सम्बन्धी हितों पर प्रभाव डालने वाले किसी मामले में अन्वेषण या रिपोर्ट करे या 8[सरकार] के धन सम्बन्धी हितों से सम्बन्धित किसी दस्तावेज को बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे या रखे, या 8[सरकार] 3।।। धन-सम्बन्धी हितों की संरक्षा के लिए किसी विधि के व्यतिक्रम को रोके ;

10 - हर ऑफिसर, जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह किसी ग्राम, नगर या जिले के किसी धर्मनिरपेक्ष सामान्य प्रयोजन के लिए किसी सम्पत्ति को ग्रहण करे, प्राप्त करे, रखे या व्यय करे, कोई सर्वेक्षण या निर्धारण करे, या कोई रेट या कर उद्गॄहीत करे, या किसी ग्राम, नगर या जिले के लोगों के अधिकारों के अभिनिश्चयन के लिए कोई दस्तावेज बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे या रखे ;

11 - हर व्यक्ति जो कोई ऐसे पद धारण कर्ता हो जिसके आधार से वह निर्वाचक नामावली तैयार करने, प्रकाशित करने, बनाए रखने, या पुनरीक्षित करने के लिए या निर्वाचन या निर्वाचन के लिए भाग को संचालित करने के लिए सशक्त हो ;

12 - हर व्यक्ति, जो - (क) सरकार की सेवा या वेतन में हो, या किसी लोक कर्तव्य के पालन के लिए सरकार से फीस या कमीशन के रूप में पारिश्रमिक पाता हो ;

(ख) स्थानीय प्राधिकारी की, अथवा केन्द्र, प्रान्त या राज्य के अधिनियम के द्वारा या अधीन स्थापित निगम की अथवा कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथा परिभाषित सरकारी कम्पनी की, सेवा या वेतन में हो ।

दृष्टांत :
नगरपालिका आयुक्त लोक सेवक है ।

स्पष्टीकरण 1 - ऊपर के वर्णनों में से किसी में आने वाले व्यक्ति लोक सेवक हैं, चाहे वे सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हों या नहीं ।

स्पष्टीकरण 2 - जहाँ कहीं “लोक सेवक” शब्द आएँ हैं, वे उस हर व्यक्ति के सम्बन्ध में समझे जाएँगे जो लोक सेवक के पद को वास्तव में धारण किए हुए हों, चाहे उस पद को धारण करने के उसके अधिकार में कैसी ही विधिक त्रुटि हो ।

स्पष्टीकरण 3 - “निर्वाचन” शब्द ऐसे किसी विधायी, नगरपालिक या अन्य लोक प्राधिकारी के नाते, चाहे वह कैसे ही स्वरूप का हो, सदस्यों के वरणार्थ निर्वाचन का द्योतक है जिसके लिए वरण करने की पद्धति किसी विधि के द्वारा या अधीन निर्वाचन के रूप में विहित की गई हो ।

धारा 22 जंगम सम्पत्ति
“जंगम सम्पत्ति” शब्दों से यह आशयित है कि इनके अन्तर्गत हर भाँति की मूर्त सम्पत्ति आती है, किन्तु भूमि और वे चीजें, जो भू-बद्ध हों या भू-बद्ध किसी चीज से स्थायी रूप से जकड़ी हुई हों, इनके अन्तर्गत नहीं आता ।

धारा 23 सदोष अभिलाभ
सदोष अभिलाभ
सदोष हानि
सदोष अभिलाभ प्राप्त करना/सदोष हानि उठाना
धारा 24 बेईमानी से
धारा 25 कपटपूर्वक
धारा 26 विश्वास करने का कारण
धारा 27 पत्नी, लिपिक या सेवक के कब्जे में सम्पत्ति
धारा 28 कूटकरण
धारा 29 दस्तावेज
धारा 29 क इलेक्ट्रानिक अभिलेख
धारा 30 मूल्यवान प्रतिभूति
धारा 31 बिल
धारा 32 कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है
धारा 33 कार्य, लोप
धारा 34 सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किये गये कार्य
धारा 35 जब कि ऐसा कार्य इस कारण अपराधित है कि वह अपराध्कि ज्ञान या आशय से किया गया है
धारा 36 अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम
धारा 37 किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना
धारा 38 अपराधिक कार्य में संपृक्त व्यक्ति विभिन्न अपराधों के दोषी हो सकेंगे
धारा 39 स्वेच्छया
धारा 40 अपराध
धारा 41 विशेष विधि
धारा 42 स्थानीय विधि
धारा 43 अवैध, करने के लिये वैध रूप से आबद्ध
धारा 44 क्षति
धारा 45 जीवन
धारा 46 मृत्यु
धारा 47 जीव जन्तु
धारा 48 जलयान
धारा 49 वर्ष, मास
धारा 50 धारा
धारा 51 शपथ
धारा 52 सद्भावनापूर्वक
धारा 52 क संश्रय
अध्याय 3
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दण्डों के विषय में
धारा 53 दण्ड
धारा 53 क निर्वसन के प्रति निर्देश का अर्थ लगाना
धारा 54 लघु दण्डादेश का लघुकरण
धारा 55 आजीवन कारावास के दण्डादेश का लघुकरण
धारा 55 क समुचित सरकार की परिभाषा
धारा 56 निरसित
धारा 57 दण्ड अवधियों की भिन्ने
धारा 58 निरसित
धारा 59 निरसित
धारा 60 दण्डादिष्ट कारावास के कतिपय मामलों में संपूर्ण कारावास या उसका कोई भाग कठिन या सादा हो सकेगा
धारा 61 निरसित
धारा 62 निरसित
धारा 63 जुर्माने की रकम
धारा 64 जुर्माना न देने पर कारावास का दण्डादेश
धारा 65 जबकि कारावास और जुर्माना दोनों आदिष्ट किये जा सकते हैं, तब जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो
धारा 66 जुर्माना न देने पर किस भाॅंति का कारावास दिया जाय
धारा 67 जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो
धारा 68 जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाना
धारा 69 जुर्माने के आनुपातिक भाग के दे दिये जाने की दशा में कारावास का पर्यवसान
धारा 70 जुर्माने का छः वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उदग्रहणीय होना

धारा 71 कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिये दण्ड की अवधि

धारा 72 कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिये दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है

धारा 73 एकांत परिरोध

धारा 74 एकांत परिरोध की अवधि

धारा 75 पूर्व दोषसिद्धि के पश्च्यात अध्याय १२ या अध्याय १७ के अधीन कतिपय अपराधों के लिये वर्धित दण्ड

साधारण अपवाद

धारा 76 विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण अपने आप को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य

धारा 77 न्यायिकत: कार्य करने हेतु न्यायाधीश का कार्य

धारा 78 न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य

धारा 79 विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य

धारा 80 विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना

धारा 81 कार्य जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किन्तु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिये किया गया है

धारा 82 सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य

धारा 83 सात वर्ष से ऊपर किन्तु बारह वर्ष से कम आयु अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य

धारा 84 विकृतिचित्त व्यक्ति का कार्य

धारा 85 ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरूद्ध मत्तता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है

धारा 86 किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्तता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है

धारा 87 सम्मति से किया गया कार्य जिसमें मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय हो और न उसकी सम्भव्यता का ज्ञान हो

धारा 88 किसी व्यक्ति के फायदे के लिये सम्मति से सदभवनापूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है

धारा 89 संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिये सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य

धारा 90 सम्मति

उन्मत्त व्यक्ति की सम्मति

शिशु की सम्मति

धारा 91 एसे कार्यों का अपवर्णन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है

धारा 92 सम्मति के बिना किसी ब्यक्ति के फायदे के लिये सदभावना पूर्वक किया गया कार्य

धारा 93 सदभावनापूर्वक दी गयी संसूचना

धारा 94 वह कार्य जिसको करने के लिये कोई ब्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है

धारा 95 तुच्छ अपहानि कारित करने वाला कार्य

निजी प्रतिरक्षा के अधिकार के विषय में

धारा 96 निजी प्रतिरक्षा में दी गयी बातें

धारा 97 शरीर तथा सम्पत्ति पर निजी प्रतिरक्षा का अधिकार

धारा 98 ऐसे ब्यक्ति का कार्य के विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकृत आदि हो

धारा 99 कार्य, जिनके विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है इस अधिकार के प्रयोग का विस्तार

धारा 100 शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है

धारा 101 कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है

धारा 102 शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहना

धारा 103 कब सम्पत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है

धारा 104 ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है

धारा 105 सम्पत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहना

धारा 106 घातक हमले के विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा के अधिकार जबकि निर्दोश व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है

दुष्प्रेरण के विषय में

धारा 107 किसी बात का दुष्प्रेरण

धारा 108 दुष्प्रेरक

धारा 108 क भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण

धारा 109 दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए और जहां तक कि उसके दण्ड के लिये कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है

धारा 110 दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है

धारा 111 दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है

धारा 112 दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिये और किये गये कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है

धारा 113 दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक दवारा आशयित से भिन्न हो

धारा 114 अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति

धारा 115 मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण यदि अपराध नहीं किया जाता यदि अपहानि करने वाला कार्य परिणामस्वरूप किया जाता है

धारा 116 कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण आदि अपराध न किया जाए यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है, जिसका कर्तव्य अपराध निवारित करना हो

धारा 117 लोक साधारण दवारा या दस से अधिक व्यक्तियों दवारा अपराध किये जाने का दुष्प्रेरण

धारा 118 मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना यदि अपराध कर दिया जाए - यदि अपराध नहीं किया जाए

धारा 119 किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक दवारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है

यदि अपराध कर दिया जाय

यदि अपराध मृत्यु, आदि से दण्डनीय है

यदि अपराध नहीं किया जाय

धारा 120 कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना

यदि अपराध कर दिया जाए - यदि अपराध नहीं किया जाए

आपराधिक षडयन्त्र

धारा 120 क आपराधिक षडयंत्र की परिभाषा

धारा 120 ख आपराधिक षडयंत्र का दण्ड

राज्य के विरूद्ध अपराधों के विषय में

धारा 121 भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना

धारा 121 क धारा 121 दवारा दण्डनीय अपराधों को करने का षडयंत्र

धारा 122 भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना

धारा 123 युद्ध करने की परिकल्पना को सफल बनाने के आशय से छुपाना

धारा 124 किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोपित करने के आशय से राट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना

धारा 124 क राजद्रोह

धारा 125 भारत सरकार से मैत्री सम्बंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरूद्ध युद्ध करना

धारा 126 भारत सरकार के साथ शान्ति का संबंध रखने वाली शक्ति के राज्य क्षेत्र में लूटपाट करना

धारा 127 धारा 125 व 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट दवारा ली गयी सम्पत्ति प्राप्त करना

धारा 128 लोक सेवक का स्व ईच्छा राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना

धारा 129 उपेक्षा से लोक सेवक का ऐसे कैदी का निकल भागना सहन करना

धारा 130 ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुडाना या संश्रय देना

सेना, नौसेना और वायुसेना से सम्बन्धित अपराधें के विषय में

धारा 131 विद्रोह का दुष्प्रेरण का किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना

धारा 132 विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाए।

धारा 133 सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी, जब कि वह अधिकारी अपने पद-निष्पादन में हो, पर हमले का दुष्प्रेरण।

धारा 134 हमले का दुष्प्रेरण जिसके परिणामस्वरूप हमला किया जाए।

धारा 135 सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा परित्याग का दुष्प्रेरण।

धारा 136 अभित्याजक को संश्रय देना

धारा 137 मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक

धारा 138 सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण।

धारा 138 क पूर्वोक्त धाराओं का भारतीय सामुद्रिक सेवा को लागू होना

धारा 139 कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति।

धारा 140 सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या प्रतीक चिह्न धारण करना

सार्वजनिक शान्ति के विरुद्ध अपराध

धारा 141 विधिविरुद्ध जनसमूह।

धारा 142 विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य होना।

धारा 143 गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होने के नाते दंड

धारा 144 घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना।

धारा 145 किसी विधिविरुद्ध जनसमूह, जिसे बिखर जाने का समादेश दिया गया है, में जानबूझकर शामिल होना या बने रहना।

धारा 146 उपद्रव करना

धारा 147 बल्वा करने के लिए दण्ड

धारा 148 घातक आयुध से सज्जित होकर उपद्रव करना।

धारा 149 विधिविरुद्ध जनसमूह का हर सदस्य, समान लक्ष्य का अभियोजन करने में किए गए अपराध का दोषी।

धारा 150 विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित करने के लिए व्यक्तियों का भाड़े पर लेना या भाड़े पर लेने के लिए बढ़ावा देना।


धारा 151 पांच या अधिक व्यक्तियों के जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् जानबूझकर शामिल होना या बने रहना

धारा 152 लोक सेवक के उपद्रव / दंगे आदि को दबाने के प्रयास में हमला करना या बाधा डालना।

धारा 153 उपद्रव कराने के आशय से बेहूदगी से प्रकोपित करना

धारा 153 क धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना।

धारा 153 ख राष्ट्रीय अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान

धारा 154 उस भूमि का स्वामी या अधिवासी, जिस पर गैरकानूनी जनसमूह एकत्रित हो

धारा 155 व्यक्ति जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया गया हो का दायित्व

धारा 156/3 उस स्वामी या अधिवासी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया जाता है

धारा 157 विधिविरुद्ध जनसमूह के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना।

धारा 158 विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना

धारा 159 दंगा

धारा 160 उपद्रव करने के लिए दण्ड।

लोकसेवकों द्वारा या उनसे सम्बन्धित अपराध

धारा 161 से 164 लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों के विषय में

धारा 166 लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने के आशय से विधि की अवज्ञा करना।

धारा 166 क कानून के तहत महीने दिशा अवहेलना लोक सेवक

धारा 166 ख अस्पताल द्वारा शिकार की गैर उपचार

धारा 167 लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है।

धारा 168 लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है

धारा 169 लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है।

धारा 170 लोक सेवक का प्रतिरूपण।

धारा 171 कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या निशानी को धारण करना।

चुनाव सम्बन्धी अपराध

धारा 171 A अभ्यर्थी, निर्वाचन अधिकार परिभाषित

धारा 171 B रिश्वत

धारा 171 C निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना

धारा 171 D निर्वाचनों में प्रतिरूपण

धारा 171 E रिश्वत के लिए दण्ड

धारा 171 F निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड

धारा 171 G निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन

धारा 171 H निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय

धारा 171 I निर्वाचन लेखा रखने में असफलता

लोकसेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के विरुद्ध अवमानना

धारा 172 समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना

धारा 173 समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना।

धारा 174 लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना

धारा 175 दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को १[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने का लोप

धारा 176 सूचना या इत्तिला देने के लिए कानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप।

धारा 177 झूठी सूचना देना।

धारा 178 शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए

धारा 179 प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक को उत्तर देने से इंकार करना।

धारा 180 कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार

धारा 181 शपथ दिलाने या अभिपुष्टि कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या अभिपुष्टि पर झूठा बयान।

धारा 182 लोक सेवक को अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति की क्षति करने के आशय से झूठी सूचना देना

धारा 183 लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध

धारा १८४ लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा डालना।

धारा १८५ लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना।

धारा १८६ लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना।

धारा १८७ लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो

धारा १८८ लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा।

धारा १८९ लोक सेवक को क्षति करने की धमकी

धारा १९० लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से रोकने हेतु किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी।

धारा 217 लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा

धारा 218 किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना

धारा 219 न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना

धारा 220 प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी

धारा 221 पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप

धारा 222 दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप

धारा 223 लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना।

धारा 224 किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा।

धारा 225 किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा

धारा 225 क उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना

धारा 225 ख अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना

धारा 226 निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी।

धारा 227 दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण

धारा 228 न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न

धारा 229क कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण

धारा 229b जूरी सदस्य या आंकलन कर्ता का प्रतिरूपण

सामग्री कब्जे में रखना

धारा 257 सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना

धारा 258 कूटकॄत सरकारी स्टाम्प का विक्रय

धारा 259 सरकारी कूटकॄत स्टाम्प को कब्जे में रखना

धारा 260 किसी सरकारी स्टाम्प को, कूटकॄत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना

धारा 271 इस आशय से कि सरकार को हानि कारित हो, उस पदार्थ पर से, जिस पर सरकारी स्टाम्प लगा हुआ है, लेख मिटाना या दस्तावेज से वह स्टाम्प हटाना जो उसके लिए उपयोग में लाया गया है

धारा 272 ऐसे सरकारी स्टाम्प का उपयोग जिसके बारे में ज्ञात है कि उसका पहले उपयोग हो चुका है

धारा 273 स्टाम्प के उपयोग किए जा चुकने के द्योतक चिन्ह का छीलकर मिटाना

धारा 273क बनावटी स्टाम्पों का प्रतिषेघ

माप और तौल से सम्बन्धित अपराध

धारा 274 तोलने के लिए खोटे उपकरणों का कपटपूर्वक उपयोग

धारा 275 खोटे बाट या माप का कपटपूर्वक उपयोग

धारा 276 खोटे बाट या माप को कब्जे में रखना

धारा 277 खोटे बाट या माप का बनाना या बेचना

लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा आदि से सम्बन्धित अपराध

धारा 278 लोक न्यूसेन्स

धारा 279 उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो

धारा 280 परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो

धारा 281 करन्तीन के नियम की अवज्ञा

धारा 282 विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय वस्तु का अपमिश्रण।

धारा 283 अपायकर खाद्य या पेय का विक्रय

धारा 284 औषधियों का अपमिश्रण

धारा 285 अपमिश्रित ओषधियों का विक्रय

धारा 286 ओषधि का भिन्न औषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय

धारा 287 लोक जल-स्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना

धारा 288 वायुमण्डल को स्वास्थ्य के लिए अपायकर बनाना

धारा 289 सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हांकना

धारा 290 जलयान का उतावलेपन से चलाना

धारा 291 भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन

धारा 292 अक्षमकर या अति लदे हुए जलयान में भाड़े के लिए जलमार्ग से किसी व्यक्ति का प्रवहण

धारा 293 लोक मार्ग या पथ-प्रदर्शन मार्ग में संकट या बाधा कारित करना।

धारा 294 विषैले पदार्थ के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण

धारा 295 अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण।

धारा 296 विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण

धारा 297 मशीनरी के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण

धारा 298 किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण

धारा 299 जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण।

धारा 300 अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक बाधा के लिए दण्ड।

धारा 301 न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना

धारा 302 अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि।

धारा 302 क ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से अश्लील सामग्री प्रिन्ट करना

धारा 303 तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि

धारा 304 अश्लील कार्य और गाने

धारा 304 क लाटरी कार्यालय रखना
धर्म से सम्बन्धित अपराध

धारा २९५ किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना।

धारा २९६ धार्मिक जमाव में विघ्न करना

धारा २९७ कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना

धारा २९८ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सविचार आशय से शब्द उच्चारित करना आदि।

धारा 353 लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

धारा 354 स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

धारा 354 क यौन उत्पीड़न

धारा 354 ख एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य

धारा 354 ग छिप कर देखना

धारा 354 घ पीछा

धारा 355 गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

धारा 356 हमला या आपराधिक बल प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जाने वाली संपत्ति की चोरी का प्रयास।

धारा 357 किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।

धारा 358 गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

धारा 359 व्यपहरण

धारा 360 भारत में से व्यपहरण।

धारा 361 विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण

धारा 362 अपहरण।

धारा 363 व्यपहरण के लिए दण्ड

धारा 363 क भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण

धारा 364 हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण करना।

धारा 364क फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण।

धारा 365 किसी व्यक्ति का गुप्त और अनुचित रूप से सीमित / क़ैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण।

धारा 366 विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना।

धारा 366 क अप्राप्तवय लड़की का उपापन

धारा 366 ख विदेश से लड़की का आयात करना

धारा 367 व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण।

धारा 368 व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या क़ैद करना।

धारा 369 दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण

धारा 370 मानव तस्करी दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना।

धारा 371 दासों का आभ्यासिक व्यवहार करना।

धारा 372 वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को बेचना।

धारा 373 वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को खरीदना।

धारा 374 विधिविरुद्ध बलपूर्वक श्रम।

धारा 375 बलात्संग

धारा 376 बलात्कार के लिए दण्ड

धारा 376 क पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र

धारा 376 ख लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग

धारा 376 ग जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग

धारा 376 घ अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग

धारा 377 प्रकॄति विरुद्ध अपराध

धारा ४४० मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि

धारा ४४१ आपराधिक अतिचार।

धारा ४४२ गॄह-अतिचार

धारा ४४३ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार

धारा ४४४ रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार

धारा ४४५ गॄह-भेदन।

धारा ४४६ रात्रौ गॄह-भेदन

धारा ४४७ आपराधिक अतिचार के लिए दण्ड।

धारा ४४८ गॄह-अतिचार के लिए दण्ड।

धारा ४४९ मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार

धारा ४५० अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार

धारा ४५१ कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार।

धारा ४५२ बिना अनुमति घर में घुसना, चोट पहुंचाने के लिए हमले की तैयारी, हमला या गलत तरीके से दबाव बनाना

धारा ४५३ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड

धारा ४५४ कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।

धारा ४५५ उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन

धारा ४५६ रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दण्ड।

धारा ४५७ कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।

धारा ४५८ क्षति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के करके रात में गॄह-अतिचार।

धारा ४५९ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो

धारा ४६० रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो

धारा ४६१ ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना

धारा ४६२ उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है।

दस्तावेज तथा सम्पत्ति-चिह्नों से सम्बन्धित अपराध

धारा ४६३ कूटरचना

धारा ४६४ मिथ्या दस्तावेज रचना

धारा ४६५ कूटरचना के लिए दण्ड।

धारा ४६६ न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना

धारा ४६७ मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत, इत्यादि की कूटरचना

धारा ४६८ छल के प्रयोजन से कूटरचना

धारा ४६९ ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न

धारा ४७० कूटरचित २[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेखट

धारा ४७१ कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना

धारा ४७२ धारा ४६७ के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना

धारा ४७३ अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना

धारा ४७४ धारा ४६६ या ४६७ में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना

धारा ४७५ धारा ४६७ में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना

धारा ४७६ धारा ४६७ में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना

धारा ४७७ विल, दत्तकग्रहण प्राधिकार-पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रदद्, नष्ट, आदि करना

धारा ४७७ क लेखा का मिथ्याकरण

धारा ४७८ व्यापार चिह्न

धारा ४७९ सम्पत्ति-चिह्न

धारा ४८० मिथ्या व्यापार चिह्न का प्रयोग किया जाना

धारा ४८१ मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना

धारा ४८२ मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग करने के लिए दण्ड।

धारा ४८३ अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरण

धारा ४८४ लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण

धारा ४८५ सम्पत्ति-चिह्न के कूटकरण के लिए कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा

धारा ४८६ कूटकॄत सम्पत्ति-चिह्न से चिन्हित माल का विक्रय

धारा ४८७ किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है।

धारा ४८८ किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड

धारा ४८९ क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिह्न को बिगाड़ना

धारा ४८९ क करेन्सी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण

धारा ४८९ ख कूटरचित या कूटकॄत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना

धारा ४८९ ग कूटरचित या कूटकॄत करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखना

धारा ४८९ घ करेन्सी नोटों या बैंक नोटों की कूटरचना या कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या कब्जे में रखना

धारा ४८९ ङ करेन्सी नोटों या बैंक नोटों से सदृश्य रखने वाली दस्तावेजों की रचना या उपयोग

सेवा-संविदा का आपराधिक भंजन

धारा ४९० समुद्र यात्रा या यात्रा के दौरान सेवा भंग

धारा ४९१ असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग

धारा ४९२ दूर वाले स्थान पर सेवा करने का संविदा भंग जहां सेवक को मालिक के खर्चे पर ले जाया जाता है

विवाह से सम्बन्धित अपराध

धारा ४९३ विधिपूर्ण विवाह का धोखे से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास।

धारा ४९४ पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना

धारा ४९५ वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ आगामी विवाह किया जाता है।

धारा ४९६ विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा करना।

धारा ४९७ व्यभिचार

धारा ४९८ विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या निरुद्ध रखना

पति या पति के सम्बन्धियों द्वारा निर्दयता

धारा 498 क किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना

धारा 499 मानहानि

धारा 500 मानहानि के लिए दण्ड।

धारा 501 मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना।

धारा 502 मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण सामग्री का बेचना

आपराधिक अभित्रास, अपमान एवं रिष्टिकरण

धारा 503 आपराधिक अभित्रास।

धारा 504 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना

धारा 505 लोक रिष्टिकारक वक्तव्य।

धारा 506 धमकाना, आईपीसी की धारा 506 में अपना बचाव कैसे करें?

धारा 507 अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास।

धारा 508 व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य

धारा 509 शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है

धारा 510 शराबी व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में दुराचार।

अपराध करने के प्रयत्न

धारा ५११ आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करने के लिए दण्ड


table 

376बलात्कार करना10 वर्ष/आजीवन कारावास377अप्राकृतिक कृत्य अपराध5 वर्ष की सजा और जुर्माना379चोरी (सम्पत्ति) करना3 वर्ष का कारावास /जुर्माना/दोनों392लूट10 वर्ष की सजा395डकैती10 वर्ष या आजीवन कारावास396डकैती के दौरान हत्या-406विश्वास का आपराधिक हनन3 वर्ष कारावास/जुर्माना/दोनों415छल करना–417छल/दगा करना1 वर्ष की सजा/जुर्माना/दोनों420छल/बेईमानी से सम्पत्ति अर्जित करना7 वर्ष की सजा और जुर्माना445गृहभेदन–446रात में नकबजनी करना–426किसी से शरारत करना3 माह की सजा/जुर्माना/दोनों463कूट-रचना/जालसाजी–477(क)झूठा हिसाब करना–489जाली नोट बनाना/चलाना10 वर्ष की सजा/आजीवन कारावास493धोखे से शादी करना10 वर्षों की सजा और जुर्माना494पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना7 वर्ष की सजा और जुर्माना495पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना और दोनों रिश्तें चलाना10 साल की सजा और जुर्माना496बगैर रजामंदी के शादी करना या जबरदस्ती विवाह करना07 साल की सजा और जुर्माना497जारकर्म करना5 वर्ष की सजा और जुर्माना498विवाहित स्त्री को भगाकर ले जाना या धोखे से ले जाना2 साल का कारावास या जुर्माना अथवा दोनों499मानहानि–500मान हानि2 वर्ष की सजा और जुर्माना506आपराधिक धमकी देना–509स्त्री को अपशब्द कहना/अंगविक्षेप करनासादा कारावास या जुर्माना511आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड–


ज़मानत (अंग्रेजी: bail) किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति को कारागार से छुड़ाने के लिये न्यायालय के समक्ष जो सम्पत्ति जमा की जाती है या देने की प्रतिज्ञा की जाती है उसे कहते हैं। जमानत पाकर न्यायालय इससे निश्चिन्त हो जाता है कि आरोपी व्यक्ति सुनवाई के लिये अवश्य आयेगा अन्यथा उसकी जमानत जब्त कर ली जायेगी (और सुनवाई के लिये न आने पर फिर से पकड़ा जा सकता है।)  ज़मानत पर रिहा होना का मतलब है कि आपकी स्वतंत्रता की सीमाएं हैं- आप को देश छोड़ने से एवं बिना आज्ञा यात्रा करने बाधित किया जा सकता है, और जब भी आवश्यक हो आप को न्यायालय अथवा पुलिस के समक्ष उपस्थित होना होता है I

ज़मानत के अनुसार अपराध दो प्रकार के होते हैं-

(१) ज़मानती अपराध (Bailable Offence) - भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा २ के अनुसार - ज़मानती अपराध से अभिप्राय ऐसे अपराध से है जो -

(क) प्रथम अनुसूची में ज़मानती अपराध के रूप में दिखाया गया हो , या

(ख) तत्समय प्रविर्त्य किसी विधि द्वारा ज़मानती अपराध बनाया गया हो , या

(ग) गैर-ज़मानती अपराध से भिन्न अन्य कोई अपराध हो।

संहिता की प्रथम अनुसूची में जमानतीय एवं गैर-ज़मानती अपराधों का उल्लेख किया गया है। जो अपराध ज़मानती बताया गया है और उसमें अभियुक्त की ज़मानत स्वीकार करना पुलिस अधिकारी एवं न्यायालय का कर्त्तव्य है। उदाहरण के लिये, किसी व्यक्ति को स्वेच्छापूर्वक साधारण चोट पहुँचाना, उसे सदोष रूप से अवरोधित अथवा परिरोधित करना, किसी स्त्री की लज्जा भंग करना, मानहानि करना आदि ज़मानती अपराध हैं।

(२) ग़ैर-ज़मानती अपराध (Non-Bailable Offence) - भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता में 'ग़ैर-ज़मानती' की परिभाषा नहीं दी गयी है। अतः हम यह कह सकते है कि ऐसा अपराध जो -

(क) ज़मानती नहीं हैं, एवं

(ख) जिसे प्रथम अनुसूची में ग़ैर-ज़मानती अपराध के रूप में अंकित किया गया है, वे ग़ैर-ज़मानती अपराध हैं।

सामान्यतया गंभीर प्रकृति के अपराधों को ग़ैर-ज़मानती बनाया गया है। ऐसे अपराधों में ज़मानत स्वीकार किया जाना या 👎 करना3 न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। उदहारण के लिये, चोरी के लिए गृह अतिचार, गृह-भेदन, अपराधिक न्यास भंग आदि ग़ैर-ज़मानती अपराध हैं।

Monday, 18 December 2023

दुनिया की सबसे बदनसीब घोषित महिला " सारा बर्टमैंन "

दुनिया की सबसे बदनसीब घोषित  महिला " सारा बर्टमैंन " का जन्म  साउथ अफ्रीका के ईस्टर्न कैप में खोइखोई ( ब्लैक अफ़्रीकन)  कबीले में  हुआ था । दो साल की उम्र के माँ बाप के गुज़रने से अनाथ हो गयी ,  
उम्र के साथ सारा जैसे-जैसे बड़ी होती गईं उनके शरीर का पिछला हिस्सा यानी नितम्ब (Hips) जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगा .....  यह उस समय असमान्य था 
हालाँकि आज के वक़्त में #किम_करदर्शियां (हॉलीवुड ऐक्ट्रेस) से प्रेरित होकर लाखों औरतें हिप्स की सिलिकॉन सर्जरी करा चुकी हैं ।

साउथ अफ्रीका में अंग्रेज राज था , एक अंग्रेज एलेग्जेंडर डनलप   ने सारा को इंग्लैंड ले जाने पर मजबूर किया  और  पैसों के लिए उसे सरकस में  अर्ध नग्न नुमाइश करवाई गई 
लोग भद्दे कमेंट करते , ज़्यादा पैसे देने पर वह इस काली महिला को उंगली या छड़ी से मार भी सकते थे ।
घरों पर पर्सनल शो आयोजन के नाम पर यौन उत्पीड़न किया गया ...... 

इंग्लैंड में गुलामी प्रथा के खिलाफ कानून बनने के बाद उसे फ्रांस को बेच दिया गया 
और उसके जिस्म पर ऐसे रेसिस्ट प्रोपगंडा रिसर्च की गईं जिसमे  बताया गया कि  " वहशी महिला "  एक " सभ्य (गोरी) महिला " से कमतर क्यों है ।

 मरने के बाद उसके बॉडी पार्ट्स को काट कर म्यूजियम में नुमाइश के लिए रख दिया गया 
#नेंसल_मंडेला  के दबाव के बाद फ्रांस काफी आनाकानी करते हुए  आखिर उसके शरीर के अवशेष वापस करने को राजी हूआ ।
और उसको राजकीय सम्मान के साथ  187 साल बाद   कफ़न नसीब हो सका  ......    🙇
सारा की बदनसीबी दक्षिण भारत की #नांगेली  से कम दुःखद नहीं है ।

यह पश्चिमी समाज आज खुद को  नारीवाद का सबसे बड़ा प्रोधा घोषित करता है 

यह आप पर निर्भर है कि आप तै करें 
यह महिला की बदनसीबी थी या  पश्चिमी समाज का घिनौनापन  था  ? 
योरोपियन  डार्क हावर्स कह देने से घिनौनेपन से राहे फरार  मुमकिन नहीं है ।

मिलियन , बिलियन डॉलर  प्रोपगंडा पर खर्च करने के बाद भी यह हक़ीक़त नहीं बदलती 
कि  " इन्सानी हुक़ूक़ के तमाम पैमाने #इस्लाम के उरूज़ के साथ तै हुए हैं ,

Sunday, 17 December 2023

भारत में कुल 72 बूचड़खाने हैं

भारत में कुल 72 बूचड़खाने हैं जिसे लाइसेंस प्राप्त हैं जिसमें से अकेले यूपी में 38 बूचड़खाने हैं। इसमें 4 बूचड़खाने ऐसे भी हैं जिसे सरकार खुद चलाती है। जोकि आगरा, सहारनपुर में है, वहीं दो अन्य प्रस्तावित बूचड़खाने लखनऊ और बरेली में है। अलीगढ़ में हिंद एग्रो आईएमपीपी पहला बूचड़खाना है जिसे 1996 में शुरु किया गया था। यहां समझने वाली बात यह है कि खाड़ी के देशों में भैंस के मांस की काफी मांग है और भारत इसके लिए सबसे कारगर देश है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यहां सस्ता मांस मिलता है और विक्रेताको इस बात का भरोसा मिलता है कि उसे हलाल मांस ही दिया जा रहा है... भारत कुल मीट निर्यात में तीसरा और बफैलो मीट निर्यात में दुनिया में पहला स्थान रखता है। भारत 70 से ज्यादा देशों को फ्रोजन और फ्रेश चिल्ड मीट का एक्सपोर्ट करता है। इसमें करीब 97 फीसदी हिस्सा फ्रोजेन बफैलो मीट का होता है, बफैलो मीट के लिए भारत के प्रमुख ग्राहक देश वियतनाम, मलेशिया, इजिप्ट, इराक, सऊदीअरब, फिलीपींस, इंडोनेशिया, यूएई, अल्जीरिया और रूस हैं। देश में करीब 11 अत्याधुनिक मीट प्लांट हैं, जहां फ्रोजेन बफैलो मीट का उत्पादन किया जाता है.. # इसलिए शाकाहार और मांसाहार बाबत मूर्ख और डबल स्टैंडर्ड लोगों की बातों के चक्कर में आकर अपना समय बरबाद ना करें

क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी।

क्लियोपेट्रा 17 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठी और 39 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। वह 9 भाषाएँ बोलती थी। वह प्राचीन मिस्र की भाषा जानत...